सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 से जुड़ी याचिका खारिज की, परीक्षा पहले ही हो चुकी है रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 (सिविल जज जूनियर डिवीजन भर्ती) से जुड़े 35 अभ्यर्थियों की याचिका शनिवार को खारिज कर दी। ये वे अभ्यर्थी थे जिन्हें संशोधित मेरिट सूची जारी होने के बाद चयन सूची से बाहर कर दिया गया था।;

Update: 2026-08-22 13:38 GMT

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2023 (सिविल जज जूनियर डिवीजन भर्ती) से जुड़े 35 अभ्यर्थियों की याचिका शनिवार को खारिज कर दी। ये वे अभ्यर्थी थे जिन्हें संशोधित मेरिट सूची जारी होने के बाद चयन सूची से बाहर कर दिया गया था।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि झारखंड सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) इस पूरी भर्ती परीक्षा को पहले ही रद्द कर चुके हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब परीक्षा ही निरस्त हो चुकी है, तब इस याचिका पर आगे सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

झारखंड लोक सेवा आयोग ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 138 पदों पर भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा 10 मार्च 2024 को आयोजित की थी। परीक्षा के बाद आयोग ने तीन बार मॉडल उत्तर कुंजी जारी की और अंततः 2 जुलाई 2024 को परिणाम तथा कट-ऑफ अंक घोषित किए। इस परिणाम में 1,797 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था।

परीक्षा परिणाम के बाद मॉडल उत्तर कुंजी में कथित त्रुटियों, आरक्षण व्यवस्था और दिव्यांग कोटा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मामला पहले झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक गया। हाईकोर्ट ने संशोधित परिणाम जारी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन आरोप लगा कि आयोग ने आदेश का पालन नहीं किया।

इसके बाद अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की, जिस पर अदालत ने जेपीएससी को कड़ी फटकार भी लगाई थी।

बता दें कि झारखंड सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन के बाद कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया। इनमें झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी शामिल है। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट ने माना कि परीक्षा निरस्त होने के बाद 35 अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई का कोई व्यावहारिक आधार नहीं बचा है।


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