राजस्थान के 611 सरकारी स्कूल बिना भवन, जयपुर में तबेले में चल रही कक्षाओं पर बवाल

रामपुरा-कंवरपुरा गांव के सरकारी स्कूल की पुरानी इमारत को करीब दो साल पहले जर्जर और बच्चों के लिए असुरक्षित घोषित किया गया था। इसके बाद स्कूल की कक्षाओं को पास के टीन शेड में स्थानांतरित कर दिया गया। स्थानीय लोगों और शिक्षकों के मुताबिक, स्कूल में करीब 30 से 35 बच्चे पढ़ते हैं।;

Update: 2026-08-22 09:15 GMT

जयपुर: Rajasthan Government Schools: राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जयपुर के पास रामपुरा-कंवरपुरा गांव में एक सरकारी स्कूल की स्थिति देखने पहुंची ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की टीम पर कथित तौर पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। टीम का आरोप है कि यहां बच्चों की कक्षाएं ऐसे टीन शेड में लगाई जा रही हैं, जहां भैंसें भी रखी जाती हैं। घटना के बाद राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

दो साल से टीन शेड में पढ़ रहे बच्चे

रामपुरा-कंवरपुरा गांव के सरकारी स्कूल की पुरानी इमारत को करीब दो साल पहले जर्जर और बच्चों के लिए असुरक्षित घोषित किया गया था। इसके बाद स्कूल की कक्षाओं को पास के टीन शेड में स्थानांतरित कर दिया गया। स्थानीय लोगों और शिक्षकों के मुताबिक, स्कूल में करीब 30 से 35 बच्चे पढ़ते हैं। CJP का दावा है कि जिस जगह बच्चों की कक्षाएं लगती हैं, वहां गोबर और चारा भी पड़ा रहता है। संगठन की टीम इसी स्थिति का जायजा लेने और बच्चों के लिए बेहतर स्कूल भवन की मांग उठाने गांव पहुंची थी।

CJP टीम पर हमले का आरोप

CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका के नेतृत्व में पहुंची टीम ने आरोप लगाया कि मौके पर उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें वहां से भागकर अपनी जान बचानी पड़ी। कार्यकर्ता शिवांगी शर्मा ने कहा कि उन्हें बाहरी और पाकिस्तानी तक कहा गया। शिवांगी ने कहा कि वह जयपुर में पली-बढ़ी हैं और बच्चों के लिए बेहतर स्कूल की मांग करना किसी दूसरे देश के लिए काम करना नहीं है। इंजीनियर और CJP कार्यकर्ता सलमान ने भी आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई और कपड़े फाड़े गए। वहीं, पुलिस के मुताबिक ग्रामीणों की ओर से CJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दी गई है। शिवदासपुरा थाना प्रभारी राजेश गौतम ने कहा कि पुलिस के मौके पर पहुंचने के समय स्थिति शांत थी और CJP की ओर से शाम तक रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई थी।

विधायक कोष से मंजूर हुए 12.50 लाख रुपये

स्थानीय विधायक कैलाश वर्मा के मुताबिक स्कूल भवन के निर्माण के लिए विधायक कोष से करीब 12.50 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। हालांकि, स्कूल की नई इमारत बनने तक बच्चों को अस्थायी व्यवस्था में ही पढ़ाई करनी पड़ रही है।

राजस्थान में 611 स्कूल बिना भवन

इस घटना के बीच राजस्थान सरकार की ओर से विधानसभा में दिए गए आंकड़ों ने शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर और गंभीर बना दी है। सरकार ने बताया कि 2025-26 के UDISE डेटा के मुताबिक राज्य में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपनी कोई इमारत नहीं है। इनमें 10 स्कूल लड़कियों के हैं। सबसे ज्यादा 23 बिना भवन वाले स्कूल झालावाड़ के अकलेरा ब्लॉक में हैं। खानपुर में 16 और झालरापाटन में 11 ऐसे स्कूल बताए गए हैं। फलोदी में भी 11 तथा बांसवाड़ा के छोटीसरवन क्षेत्र में 10 स्कूल बिना भवन के संचालित हो रहे हैं।

हजारों स्कूलों में टॉयलेट-पानी की सुविधा नहीं

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 64,484 सरकारी स्कूलों के पास भवन मौजूद हैं, लेकिन इनमें भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है। करीब 2,047 स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं है, जबकि 1,049 स्कूलों में पीने का पानी उपलब्ध नहीं है।

सरकार ने बताया अपना प्लान

राज्य सरकार का कहना है कि स्कूलों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए 550 करोड़ रुपये तथा नए भवनों के निर्माण के लिए 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा स्कूल शिक्षा विभाग के स्तर पर हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये और पांच साल में 12,500 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं और फंड के जरिए उपलब्ध कराने की बात कही गई है। विपक्ष के नेता टीका राम जूली ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में 3,700 से अधिक स्कूल पूरी तरह जर्जर और असुरक्षित घोषित किए जा चुके हैं। उनका आरोप है कि कई स्कूलों को बंद या दूसरी जगह स्थानांतरित किए जाने से छात्रों की संख्या पर भी असर पड़ा है।

सरकार और CJP के आमने-सामने आने से बढ़ा विवाद

राजस्थान के गृहमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने मामले को राजनीतिक रंग देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े लोग अलग-अलग मुखौटों में गांवों में जाकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने CJP के कांग्रेस से संबंध होने का आरोप लगाया और कहा कि पूरे मामले की जांच होगी। रामपुरा-कंवरपुरा की घटना ने फिलहाल दो अलग-अलग सवाल खड़े किए हैं—एक तरफ स्कूल का संचालन अस्थायी और कथित तौर पर बेहद खराब परिस्थितियों में होने का मुद्दा है, तो दूसरी तरफ स्कूल की स्थिति देखने पहुंचे कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

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