हैदराबाद/नई दिल्ली: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी का प्रस्तावित अमेरिका दौरा केंद्र सरकार से राजनीतिक मंजूरी नहीं मिलने के कारण रद्द हो गया है। रेड्डी फिलहाल ब्रिटेन के दौरे पर हैं और ‘तेलंगाना राइजिंग’ प्रतिनिधिमंडल के साथ 10 दिवसीय ब्रिटेन-अमेरिका यात्रा पर निकले थे। अब उनके कार्यक्रम में बदलाव किया गया है और वह 23 अगस्त को लंदन से सीधे हैदराबाद लौटेंगे। केंद्र सरकार ने अमेरिका दौरे को मंजूरी नहीं देने के पीछे किसी राजनीतिक दुर्भावना से इनकार किया है और इसे निर्धारित प्रक्रियाओं से जुड़ा फैसला बताया है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा कि मुख्यमंत्रियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की विदेश यात्राओं के लिए राजनीतिक मंजूरी देते समय मंत्रालय प्रस्तावित कार्यक्रम का आकलन करता है। इसमें यह देखा जाता है कि यात्रा का कार्यक्रम संबंधित पद की गरिमा और यात्रा के घोषित उद्देश्य के अनुरूप है या नहीं। जायसवाल के मुताबिक, रेवंत रेड्डी के अमेरिका दौरे के प्रस्तावित कार्यक्रम को इस कसौटी पर उपयुक्त नहीं पाया गया। इसी वजह से अमेरिका जाने की राजनीतिक मंजूरी नहीं दी गई। हालांकि, मुख्यमंत्री के ब्रिटेन दौरे को मंजूरी दी गई थी।
ममदानी और जेडी वेंस से मुलाकात बनी वजह?
केंद्र के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि प्रस्तावित अमेरिकी कार्यक्रम में न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से संभावित मुलाकातों ने मामले को संवेदनशील बना दिया। सूत्रों के मुताबिक, रेवंत रेड्डी के प्रतिनिधिमंडल की ओर से अमेरिका प्रवास के दौरान इन नेताओं से मुलाकात की योजना बनाई गई थी। बताया जा रहा है कि इन संपर्कों को लेकर तेलंगाना मुख्यमंत्री कार्यालय ने संबंधित अमेरिकी पक्ष से सीधे संवाद किया था। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में न तो ममदानी और न ही वेंस के नाम को अमेरिका दौरे की मंजूरी नहीं देने की वजह बताया है। मंत्रालय ने केवल कार्यक्रम को पद और यात्रा के उद्देश्य के अनुरूप नहीं पाए जाने की बात कही है।
जोहरान ममदानी को लेकर क्यों चर्चा?
न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी भारतीय मूल के अमेरिकी राजनेता हैं। उनके भारत से पारिवारिक संबंध भी हैं और उनकी मां फिल्मकार मीरा नायर हैं। अमेरिकी राजनीति में उनका प्रभाव बढ़ने के साथ भारत में भी उनके बयानों को लेकर चर्चा होती रही है। ममदानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गुजरात दंगों के संदर्भ में पहले तीखी राजनीतिक टिप्पणियां कर चुके हैं। ऐसे में भारत सरकार के लिए उनके साथ किसी भारतीय मुख्यमंत्री की प्रस्तावित आधिकारिक मुलाकात को लेकर अतिरिक्त संवेदनशीलता होना बताया जा रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात किसी भी भारतीय मुख्यमंत्री के विदेशी दौरे में उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क मानी जा सकती है। इसलिए दोनों मुलाकातों को लेकर केंद्र और राज्य के बीच कार्यक्रम की प्राथमिकताओं पर मतभेद की चर्चा तेज हो गई है।
शिक्षा और निवेश पर था फोकस
तेलंगाना मुख्यमंत्री कार्यालय का कहना है कि अमेरिका यात्रा का मुख्य उद्देश्य राज्य में शिक्षा, निवेश और वैश्विक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाना था। प्रस्तावित कार्यक्रम में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ संभावित समझौतों और सहयोग पर चर्चा शामिल थी। ‘तेलंगाना राइजिंग’ अभियान के तहत राज्य सरकार अंतरराष्ट्रीय निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। ऐसे में अमेरिका यात्रा को राज्य के आर्थिक और शैक्षिक एजेंडे के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
विदेश यात्रा के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी
भारत में मुख्यमंत्री, मंत्री और अन्य संवैधानिक या गणमान्य पदों पर बैठे लोगों की आधिकारिक विदेश यात्राओं के लिए केंद्र सरकार की पूर्व राजनीतिक मंजूरी जरूरी होती है। विदेश मंत्रालय प्रस्तावित कार्यक्रम, यात्रा के उद्देश्य, संबंधित पद की गरिमा और विदेशी पक्षों के साथ होने वाली बैठकों को ध्यान में रखकर मंजूरी पर फैसला करता है। इस मामले में केंद्र ने ब्रिटेन दौरे को मंजूरी दी, लेकिन अमेरिका के कार्यक्रम को मंजूरी नहीं मिली। इसके चलते रेवंत रेड्डी को अपने 10 दिवसीय ब्रिटेन-अमेरिका दौरे को बीच में ही समाप्त करना पड़ा है।
केंद्र-राज्य संबंधों पर भी उठेंगे सवाल
रेवंत रेड्डी के अमेरिका दौरे की मंजूरी रद्द होने के बाद अब केंद्र और तेलंगाना सरकार के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़ने की संभावना है। कांग्रेस शासित तेलंगाना में पहले से ही केंद्र के साथ कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं। हालांकि, फिलहाल विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि अमेरिका दौरे को मंजूरी नहीं देने का फैसला प्रक्रियागत आधार पर लिया गया है। वहीं, राज्य सरकार का जोर इस बात पर है कि यात्रा का उद्देश्य शिक्षा, निवेश और तेलंगाना के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना था। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रस्तावित अमेरिकी कार्यक्रम में ऐसा क्या था, जिसे केंद्र ने संबंधित पद और यात्रा के उद्देश्य के अनुरूप नहीं माना।