डिजिटल धोखाधड़ी मामले में अदालत का बड़ा आदेश, कहा- RBI की एसओपी पूरे भारत में लागू करे सरकार
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल धोखाधड़ी पर बड़ा आदेश देते हुए केंद्र सरकार को आरबीआई की एसओपी को पूरे भारत में लागू करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ₹54,000 करोड़ से ज्यादा की ठगी और डकैती के समान है।
नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए इसे डकैती या लूट करार दिया है। अदालत ने कहा कि अब तक ₹54,000 करोड़ से अधिक की राशि साइबर ठगी के जरिए निकाली जा चुकी है, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा तैयार किए गए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को पूरे देश में औपचारिक रूप से लागू किया जाए, ताकि डिजिटल फ्रॉड पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।
बैंक अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में बैंकों की लापरवाही या अधिकारियों की मिलीभगत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई और बैंकों से कहा कि वे ऐसे मामलों में समय पर और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।
सुनवाई के दौरान अदालत ने बताया कि आरबीआई ने पहले ही एक एसओपी तैयार किया है, जिसके तहत साइबर फ्रॉड की आशंका होने पर अस्थायी रूप से डेबिट कार्ड को होल्ड पर डालने जैसी त्वरित कार्रवाई का प्रावधान है। इसका उद्देश्य धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान को तुरंत रोकना है।
अंतर-विभागीय समन्वय के लिए बड़ा आदेश
डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक और अहम निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि अंतर-विभागीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए चार सप्ताह के भीतर एक ड्राफ्ट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) तैयार किया जाए। अदालत ने साफ शब्दों में कहा हम केंद्र सरकार को निर्देश देते हैं कि वह आरबीआई की एसओपी को औपचारिक रूप से अपनाए और पूरे भारत में लागू करे, ताकि डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने में एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय हो सके। अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह देशभर में सामने आए डिजिटल अरेस्ट मामलों की पहचान करे और उनसे जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच की जाए।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात और दिल्ली सरकारों से कहा है कि जिन मामलों की पहचान की जाए, उनमें जांच के लिए आवश्यक मंजूरी (सैंक्शन) बिना देरी के प्रदान की जाए, ताकि जांच प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरबीआई, दूरसंचार विभाग (DoT) और अन्य संबंधित एजेंसियां आपस में समन्वय कर एक संयुक्त बैठक आयोजित करें। इस बैठक का उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट के शिकार लोगों को मुआवजा देने के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी ढांचा तैयार करना होगा।
पीड़ितों के प्रति उदार और व्यावहारिक दृष्टिकोण की जरूरतसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देते समय तकनीकी जटिलताओं में उलझने के बजाय एक व्यावहारिक और उदार रवैया अपनाया जाना चाहिए। अदालत के अनुसार, ऐसे अपराधों में आम नागरिक मानसिक और आर्थिक रूप से गहरा नुकसान झेलता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।