नई दिल्ली/लाहौर। क्रिकेट जगत के सबसे बहुप्रतीक्षित मुकाबलों में से एक भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर बना सस्पेंस अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। जिस मुकाबले पर कुछ दिन पहले तक बहिष्कार की तलवार लटक रही थी, उसी पर अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के रुख में बदलाव की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि यह बदलाव बिना शर्त नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीसीबी भारत के खिलाफ खेलने को तैयार है, लेकिन उसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के सामने तीन अहम शर्तें रख दी हैं। इस घटनाक्रम ने न केवल क्रिकेट प्रशंसकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, बल्कि वैश्विक क्रिकेट राजनीति को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
लाहौर में हाई-लेवल बैठक
रविवार, 8 फरवरी को लाहौर में पीसीबी और आईसीसी के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। यह बैठक ऐसे समय में आयोजित की गई जब टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज में भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत में ज्यादा समय नहीं बचा है। आईसीसी इस हाई-वोल्टेज मुकाबले को लेकर किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता, क्योंकि यह मैच वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक दर्शक और राजस्व आकर्षित करता है। बैठक में पीसीबी चेयरमैन मोहसिन नकवी, आईसीसी के डिप्टी चेयरमैन इमरान ख्वाजा और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल शामिल हुए। आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजोग गुप्ता वर्चुअल माध्यम से जुड़े। बैठक का मुख्य एजेंडा भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर बने गतिरोध को समाप्त करना था।
पीसीबी की तीन प्रमुख मांगें
क्रिकबज की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अगर अपने बहिष्कार के फैसले को वापस लेता है, तो इसके बदले उसे कुछ ठोस आश्वासन चाहिए। पीसीबी ने कथित तौर पर आईसीसी के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं:
ICC रेवेन्यू में बड़ा हिस्सा
पाकिस्तान चाहता है कि उसे ICC की राजस्व साझेदारी में अधिक हिस्सा मिले। उसका तर्क है कि बड़े मुकाबलों में उसकी भागीदारी भी व्यावसायिक मूल्य जोड़ती है।
भारत के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट की बहाली
पीसीबी की दूसरी मांग है कि भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय सीरीज दोबारा शुरू की जाए। दोनों देशों के बीच लंबे समय से केवल आईसीसी या बहु-राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में ही मुकाबले होते हैं।
हैंडशेक प्रोटोकॉल का सख्त पालन
तीसरी मांग खेल भावना से जुड़ी है। पाकिस्तान चाहता है कि मैच के दौरान और बाद में खिलाड़ियों के बीच पारंपरिक हैंडशेक या औपचारिक अभिवादन की प्रक्रिया को सख्ती से लागू किया जाए। इन मांगों से यह स्पष्ट होता है कि मुद्दा सिर्फ एक मैच का नहीं, बल्कि व्यापक क्रिकेट संबंधों और आर्थिक हिस्सेदारी से भी जुड़ा हुआ है।
क्या मांगें व्यावहारिक हैं?
विशेषज्ञों का मानना है कि PCB की कुछ मांगें व्यवहारिक चुनौतियों से जुड़ी हैं। उदाहरण के लिए, भारत लंबे समय से पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज नहीं खेलता और यह निर्णय केवल क्रिकेट बोर्ड का नहीं, बल्कि व्यापक नीतिगत और कूटनीतिक संदर्भों से भी प्रभावित होता है। जहां तक आईसीसी रेवेन्यू में बड़े हिस्से की मांग का सवाल है, राजस्व वितरण आम तौर पर उस बाजार और व्यावसायिक योगदान पर आधारित होता है जो सदस्य देश वैश्विक क्रिकेट को देते हैं। भारत विश्व क्रिकेट का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है और प्रसारण व प्रायोजन से होने वाली आय में उसका योगदान महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान का तर्क यह है कि भारत-पाक मुकाबले की लोकप्रियता में उसकी भी बराबर की भूमिका है, इसलिए उसे भी अधिक आर्थिक हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान सरकार ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि राष्ट्रीय टीम भारत के खिलाफ नहीं खेलेगी, भले ही मैच न्यूट्रल वेन्यू पर क्यों न हो। हालांकि इस निर्णय के पीछे स्पष्ट कारण नहीं बताए गए, लेकिन क्रिकेट जगत में इसे क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा गया। चर्चा यह भी रही कि पाकिस्तान का रुख बांग्लादेश के समर्थन में हो सकता है। बांग्लादेश ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए अपने मैच भारत से बाहर कराने की मांग की थी, जिसे ICC ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से बदला और भारत-पाक मैच भी विवाद के दायरे में आ गया।
ICC की भूमिका और दबाव
ICC के लिए भारत-पाकिस्तान मुकाबला केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक ब्रांड का प्रमुख आकर्षण है। प्रसारण अधिकार, विज्ञापन अनुबंध और टिकट बिक्री का बड़ा हिस्सा इसी मुकाबले पर निर्भर करता है। ऐसे में इस मैच का रद्द होना आर्थिक रूप से बड़ा झटका साबित हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, ICC समाधान निकालने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड मुआवजे की मांग कर सकता है, और इस पूरे समझौते में पाकिस्तान की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
बातचीत का दौर जारी?
अब सबकी निगाहें ICC के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या वह पीसीबी की शर्तों को आंशिक रूप से स्वीकार करेगा? क्या कोई मध्य मार्ग निकलेगा? या फिर गतिरोध जारी रहेगा? क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह मुकाबला सिर्फ खेल नहीं, बल्कि भावनाओं और प्रतिस्पर्धा का प्रतीक है। हर बार जब भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होते हैं, तो यह मैच वैश्विक इवेंट का रूप ले लेता है। ऐसे में यदि विवाद सुलझ जाता है तो प्रशंसकों के लिए बड़ी राहत होगी। फिलहाल, बातचीत का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह हाई-वोल्टेज मुकाबला तय कार्यक्रम के अनुसार होगा या क्रिकेट राजनीति एक बार फिर खेल पर भारी पड़ेगी।