सोनिया गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, बोलीं- जवाबदेही मांगने वाले छात्रों को दुश्मन की तरह देख रही है सरकार
सोनिया गांधी ने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्र आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने छात्रों की मांगों, NTA की कार्यप्रणाली, सरकारी शिक्षा में निवेश और रोजगार के मुद्दों पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही की मांग की।;
सोनिया गांधी ने कहा कि देशभर के छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं पर कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की बात सुनी जानी चाहिए, लेकिन इसके बजाय सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है।
प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल
अपने लेख में सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग की खबरों ने कई सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने 20 जुलाई की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में कई छात्र घायल हुए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज को बल प्रयोग से नहीं, बल्कि संवाद के जरिए संबोधित किया जाना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था पर तीन बड़े सवाल
सोनिया गांधी ने अपने लेख में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े तीन प्रमुख मुद्दों को सामने रखा।
1. सरकारी शिक्षा में निवेश का सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी शिक्षा पर खर्च अपेक्षित स्तर पर नहीं बढ़ा है। उनका कहना है कि सार्वजनिक शिक्षा संस्थानों को मजबूत करने के बजाय निजी शिक्षा संस्थानों का विस्तार अधिक तेजी से हुआ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि परिवार प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग पर भारी खर्च करने को मजबूर हैं।
2. परीक्षा प्रणाली और NTA पर सवाल
कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। पेपर लीक जैसी घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है।
3. रोजगार और जवाबदेही का मुद्दा
सोनिया गांधी ने कहा कि शिक्षा पूरी करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा से जुड़े विवादों के बावजूद सरकार जवाबदेही तय करने से बच रही है।
'छात्रों के साथ खड़ा होना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी'
लेख के अंत में सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों का भविष्य देश के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनना और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा करना केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि नैतिक और संवैधानिक दायित्व भी है। शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक सुधार आवश्यक हैं।