सोनम वांगचुक फिर एक्टिव, केंद्र के सामने रखीं ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मांगें; बोले- अधिकारों से समझौता नहीं

सोनम वांगचुक और लद्दाख के प्रतिनिधियों ने गृह मंत्रालय के सामने निर्वाचित विधानसभा, वित्तीय अधिकार, संवैधानिक सुरक्षा और अलग लोक सेवा आयोग समेत कई नॉन-नेगोशिएबल मांगें रखीं।;

Update: 2026-08-20 05:55 GMT

लेह। लद्दाख के राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों को लेकर चल रही बातचीत के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर सक्रिय नजर आए हैं। वांगचुक ने लद्दाख के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की और केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगों की एक सूची रखी। प्रतिनिधियों ने इन मांगों को ‘नॉन-नेगोशिएबल’ यानी ऐसी मांगें बताया, जिन पर समझौता नहीं किया जाएगा।

लेह में हुई बैठक में कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए), लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा जान, केडीए के सह-अध्यक्ष सज्जाद करगिली, सोनम वांगचुक और एलएबी के सह-अध्यक्ष चेरिंग दोरजे समेत कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।

निर्वाचित विधानसभा और वित्तीय अधिकार प्रमुख मांग

प्रतिनिधियों ने लद्दाख के लिए सीधे निर्वाचित और संवैधानिक अधिकारों से लैस केंद्रशासित प्रदेश स्तर की विधानसभा की मांग को प्राथमिकता दी। उनका कहना है कि विधानसभा को बजट, कराधान, सरकारी खर्च, कर्ज और सार्वजनिक धन से जुड़े मामलों में प्रभावी तथा संवैधानिक रूप से सुरक्षित अधिकार मिलने चाहिए।

इसके साथ ही लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा वाले समेकित निधि और आकस्मिक निधि की मांग भी सामने रखी गई है। प्रतिनिधियों का तर्क है कि इससे स्थानीय स्तर पर वित्तीय निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी।

अलग लोक सेवा आयोग और प्रशासनिक कैडर की मांग

लद्दाख के प्रतिनिधियों ने अलग लोक सेवा आयोग स्थापित करने की मांग भी रखी है। इसके अलावा उन्होंने लद्दाख प्रशासनिक सेवा और लद्दाख पुलिस सेवा बनाने तथा क्षेत्र के लिए उपयुक्त लद्दाख-विशिष्ट कैडर तैयार करने की मांग की।

प्रतिनिधियों के अनुसार, प्रशासनिक व्यवस्था में स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है। उनका कहना है कि इससे लद्दाख में शासन और प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

24 सितंबर की घटना पर न्याय और मुआवजे की मांग

बैठक में 24 सितंबर 2025 की पुलिस फायरिंग से जुड़े मामलों को भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधियों ने घटना में मारे गए लोगों के लिए न्याय, सम्मानजनक मुआवजा और संबंधित मामलों को वापस लेने की मांग की।

उन्होंने घायलों और अन्य प्रभावित लोगों को उचित सहायता देने की भी मांग की। घटना की पहली बरसी नजदीक आने के बीच प्रतिनिधियों ने इस मामले से जुड़े मामलों को बिना शर्त वापस लेने का प्रस्ताव भी गृह मंत्रालय के समक्ष रखा।

संवैधानिक समाधान तक अंतरिम सुरक्षा की मांग

प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक लद्दाख के लिए स्थायी संवैधानिक व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक क्षेत्र की जमीन, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय हितों की अंतरिम सुरक्षा जरूरी है।

इसके अलावा कारोबार, व्यावसायिक इकाइयों के पंजीकरण और ट्रेड लाइसेंस के लिए लद्दाख निवासी प्रमाण पत्र (एलआरसी) को अनिवार्य बनाने की मांग भी की गई। प्रतिनिधियों का कहना है कि स्थानीय निवास प्रमाणपत्र को कारोबार संबंधी प्रक्रियाओं से जोड़ा जाना चाहिए।

लद्दाख के संगठनों और केंद्र के बीच इससे पहले 22 मई को नई दिल्ली में भी बातचीत हुई थी। ताजा बैठक के बाद अब इन मांगों पर केंद्र के अगले कदम का इंतजार है।

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