राम मंदिर ट्रस्ट में महासचिव की नियुक्ति फिर टली, चंपतराय की वापसी की अटकलों से बढ़ी हलचल

गत सोमवार को सामने आई एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट को भी चंपतराय की संभावित वापसी से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट में उन्हें कथित तौर पर लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना गया है, लेकिन उन पर चढ़ावा चोरी के मामले में सीधे तौर पर आरोप लगाए जाने की बात सामने नहीं आई है।;

Update: 2026-08-20 04:10 GMT

अयोध्या : श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में महासचिव पद पर नई नियुक्ति फिलहाल टलती नजर आ रही है। ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कई नामों पर चर्चा के बावजूद किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाने को इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है। वहीं, पूर्व महासचिव चंपतराय की हालिया सक्रियता और उनके संभावित वापसी की चर्चाओं ने भी इस पद पर नियुक्ति को लेकर तस्वीर बदल दी है। ट्रस्ट की आगामी दो सितंबर की बैठक को अब महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि महासचिव पद को फिलहाल खाली रखते हुए सचिव, प्रवक्ता और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) से जुड़े फैसलों पर मुहर लग सकती है।

चंपतराय की वापसी की चर्चा तेज

चंपतराय और ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र ने चढ़ावा चोरी मामले में कथित अनियमितताओं और लापरवाही के आरोपों के बीच अपने पदों से इस्तीफा दिया था। इसके बाद छह जुलाई की बैठक में ट्रस्ट ने सीईओ की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय चयन समिति गठित की थी। साथ ही नए महासचिव की नियुक्ति होने तक मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए ट्रस्टी कृष्णमोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। तब से वह ट्रस्ट की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अब चंपतराय की दोबारा सक्रियता के बाद उनकी वापसी की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ट्रस्ट के कुछ सदस्यों का मानना है कि यदि जांच में उनके खिलाफ गंभीर आरोप साबित नहीं हुए हैं, तो उन्हें फिर से जिम्मेदारी देने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।

एसआईटी रिपोर्ट के बाद बदला माहौल

गत सोमवार को सामने आई एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट को भी चंपतराय की संभावित वापसी से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट में उन्हें कथित तौर पर लापरवाही के लिए जिम्मेदार माना गया है, लेकिन उन पर चढ़ावा चोरी के मामले में सीधे तौर पर आरोप लगाए जाने की बात सामने नहीं आई है। विहिप से जुड़े एक पदाधिकारी का कहना है कि ट्रस्ट ने उस समय परिस्थितियों को देखते हुए उनका इस्तीफा स्वीकार किया था। जांच में गंभीर आरोप नहीं मिलने के बाद उनकी वापसी का रास्ता खुल सकता है। ट्रस्टी महंत दिनेंद्रदास ने भी कहा है कि चढ़ावा चोरी मामले की जांच के दौरान ट्रस्ट ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया था। यदि जांच में उनके खिलाफ कोई आरोप नहीं पाया गया है, तो उनकी वापसी में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।

जुलाई बैठक में भी नहीं हुआ फैसला

22 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में महासचिव पद पर नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही थी। उस समय विहिप के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, विहिप संरक्षक मंडल के सदस्य दिनेशचंद्र और बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक नीरज दौनेरिया समेत कई नाम चर्चा में थे। अंतिम दौर में बजरंग लाल बांगड़ा का नाम सबसे आगे बताया जा रहा था, लेकिन बैठक में नियुक्ति की घोषणा नहीं हो सकी। इसके बाद से महासचिव पद को लेकर असमंजस बना हुआ है।

तीन रिक्त पदों में दो पर फैसला संभव

ट्रस्ट में फिलहाल तीन पद रिक्त हैं। इनमें दो पद चंपतराय और डॉ. अनिल कुमार मिश्र के इस्तीफे के बाद खाली हुए, जबकि तीसरा पद अयोध्या राजपरिवार के पूर्व प्रमुख विमलेंद्र मोहन मिश्र के निधन से रिक्त हुआ है। चंपतराय की संभावित वापसी की चर्चाओं के बीच माना जा रहा है कि दो सितंबर की बैठक में इन तीन में से दो पदों पर नए सदस्यों का मनोनयन किया जा सकता है। एक पद भविष्य के निर्णय के लिए छोड़ा जा सकता है।

सीईओ और सचिव पद पर तस्वीर साफ

ट्रस्ट के पहले सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इसके लिए अंतिम साक्षात्कार पूरा होने की जानकारी है। चयन समिति जल्द ही तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को सौंप सकती है, जिसमें से एक नाम पर ट्रस्टी अंतिम फैसला करेंगे। वहीं, सचिव पद की जिम्मेदारी प्रोजेक्ट इंजीनियर जगदीश आफले को दिए जाने की चर्चा है। वह काम संभाल रहे हैं और अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी मानी जा रही है।

प्रवक्ता पद पर यतींद्र मोहन मिश्र का नाम

प्रवक्ता पद के लिए प्रख्यात साहित्यकार यतींद्र मोहन मिश्र का नाम चर्चा में है। उनके ट्रस्ट में शामिल होने की भी संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि उन्हें उनके दिवंगत पिता के स्थान पर ट्रस्टी बनाए जाने पर भी विचार हो सकता है। अब सबकी नजर दो सितंबर की ट्रस्ट बैठक पर है। इस बैठक में महासचिव पद पर क्या फैसला होता है और चंपतराय की वापसी को लेकर चल रही अटकलों का अंत कैसे होता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

Tags:    

Similar News