राम मंदिर के लिए सीईओ भर्ती प्रक्रिया शुरू, 18 जुलाई तक मांगे गए आवेदन; मंदिर प्रशासन में आएगा नया कॉर्पोरेट मॉडल

अयोध्या राम मंदिर में सीईओ पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। 18 जुलाई तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और कॉर्पोरेट शैली की कार्यप्रणाली लागू की जाएगी।;

Update: 2026-07-13 10:37 GMT

अयोध्या। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पद के लिए आवेदन आमंत्रित कर दिए हैं। तीन वर्ष के कार्यकाल वाले इस पद के लिए 18 जुलाई अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। ट्रस्ट का उद्देश्य मंदिर के प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाना है।

योग्यता और चयन प्रक्रिया

अधिसूचना के अनुसार 50 से 70 वर्ष आयु वर्ग का कोई भी स्नातक अभ्यर्थी आवेदन कर सकता है। उम्मीदवार का हिंदू एवं श्रीरामभक्त वैष्णव होना आवश्यक है। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का ज्ञान अनिवार्य रखा गया है। चयनित अभ्यर्थी को अयोध्या में रहकर कार्य करना होगा।

सीईओ पद के लिए कम से कम 20 वर्ष का प्रशासनिक या प्रबंधकीय अनुभव आवश्यक है। यह अनुभव प्रशासन, वित्त, लेखा, मानव संसाधन, जनसंपर्क, सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा या विधि जैसे क्षेत्रों में होना चाहिए। मंदिर प्रबंधन का पूर्व अनुभव रखने वालों को वरीयता दी जाएगी। सेवानिवृत्त अधिकारी भी आवेदन कर सकेंगे।

कॉर्पोरेट शैली में होगा संचालन

ट्रस्ट ने मंदिर के प्रशासन में स्पष्ट जिम्मेदारियां और निर्धारित कार्यप्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। आय-व्यय, दान, खरीद और विकास कार्यों के लिए लिखित प्रक्रियाएं, नियमित ऑडिट और डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली अपनाई जाएगी। प्रत्येक कार्य के लिए अलग टीम बनाई जाएगी और उसकी जवाबदेही भी तय होगी।

सीईओ की प्रमुख जिम्मेदारियां

नए सीईओ को मंदिर की वित्तीय, प्रशासनिक और वैधानिक व्यवस्थाओं की निगरानी करनी होगी। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन तथा वीआईपी आगंतुकों की व्यवस्थाओं का समन्वय भी उनकी जिम्मेदारी होगी। मंदिर की संपत्तियों के संरक्षण और नियमानुसार निवेश पर भी सीईओ की नजर रहेगी।

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने स्पष्ट किया है कि सीईओ ट्रस्ट के अधीन कार्य करेगा और उसके कामकाज में किसी प्रकार का सरकारी हस्तक्षेप नहीं होगा। ट्रस्ट नीतिगत निर्णय लेगा, जबकि दैनिक संचालन पेशेवर ढंग से संचालित किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत डिजिटल मॉनिटरिंग, सीसीटीवी निगरानी और डेटा-आधारित निर्णयों पर विशेष जोर दिया जाएगा। ट्रस्ट को उम्मीद है कि इन बदलावों से मंदिर प्रशासन अधिक पारदर्शी, अनुशासित और श्रद्धालुओं के प्रति उत्तरदायी बनेगा।

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