'22 करोड़ मुसलमान मोदी सरकार गिराने को पढ़ रहे नमाज', पॉडकास्ट में अवध ओझा के बयान से छिड़ी बहस

पूर्व आप नेता और शिक्षक अवध ओझा के पॉडकास्ट में दिए गए बयान चर्चा का विषय बन गए हैं। धर्म, राजनीति और चुनावी अनुभवों पर उनकी टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है।;

Update: 2026-07-13 10:53 GMT
नई दिल्ली। प्रसिद्ध शिक्षक और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता अवध ओझा के हालिया पॉडकास्ट में दिए गए बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गए हैं। उन्होंने लोकतंत्र, चुनावी राजनीति, पाकिस्तान और धार्मिक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए, जिन पर अब व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

राजनीतिक भाषणों के मुद्दों पर उठाए सवाल

एक यूट्यूब चैनल को दिए गए साक्षात्कार में ओझा ने कहा कि राजनीतिक सभाओं में विकास, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय आय जैसे विषयों की अपेक्षा भावनात्मक और राष्ट्रवादी मुद्दों पर जनता अधिक प्रतिक्रिया देती है। उनके अनुसार, कई बार नेताओं की प्राथमिकता जनसमर्थन जुटाना होती है, जिसके कारण पाकिस्तान और धर्म से जुड़े विषय प्रमुखता से सामने आते हैं।

नमाज संबंधी टिप्पणी पर बढ़ी चर्चा

बातचीत के दौरान अवध ओझा ने मुसलमानों और नमाज को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि देश के 22 करोड़ मुसलमान मोदी सरकार को गिराने के लिए नमाज पढ़ रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि इस वजह से देश के मुसलमान परेशान हैं। बड़ी संख्या में लोग सरकार के खिलाफ दुआएं कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आ रहा है। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों ने इसे कटाक्ष माना, जबकि अन्य ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील विषय बताते हुए आपत्ति जताई।

पाकिस्तान और विदेश नीति पर रखी राय

ओझा ने यह भी कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा आर्थिक और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर केंद्रित करनी चाहिए। उनके अनुसार, देश के समक्ष दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान विकास, शिक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्राथमिकता देकर किया जा सकता है। उन्होंने आपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान को लेकर पूछे गए एक सवाल का विस्तार से जवाब देते हुए कहा कि इस देश के लोग पाकिस्तान और मुसलमान पर ताली बजाते हैं। अवध ओझा ने पहले तो कुछ बातें लोकतंत्र को लेकर कही और फिर जनता के पाकिस्तान-मुसलमान के नाम पर खुश होने का जिक्र करते हुए कहा, 'हमारे नेता क्या करते हैं, भाषण देने जाते हैं, वह यदि राष्ट्रीय आय पर बोले तो पब्लिक सो जाएगी, बैठी रहेगी। क्योंकि उसे जाते वक्त समोसे चाय का वादा किया गया है। वह बैठी रहेगी।

नेता सोचता है ताली नहीं बची फिर वह कहता है कि पाकिस्तान को धूल में मिला देंगे पब्लिक खड़े होकर ताली बजाएगी। नेता को तो ताली बजवानी है ना। जिस देश में पब्लिक पाकिस्तान पर ताली बजाती हो....? हमें पाकिस्तान से लड़ना है, वह भूखा नंगा देश। वह नंगा है, हम कुर्ता पायजामा पहने हैं, हम उससे लड़ेंगे वह हमारा कुर्ता पायजामा फाड़ देगा। हमें लड़ना ही है तो चाइना से लड़ना है। सूट बूट पहने इनकी टाई खींच लाए, घड़ी लाए। झोपड़पट्टी में कूदोगे डकैती के लिए।

पटपड़गंज चुनाव का अनुभव साझा किया

पॉडकास्ट में उन्होंने दिल्ली की पटपड़गंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के अपने अनुभवों का भी उल्लेख किया। ओझा ने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का सहयोग मिला। उन्होंने अपनी हार को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि जनता का स्नेह उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि रहा।

बयान पर प्रतिक्रियाओं का इंतजार

अभी तक उनके इन बयानों पर किसी प्रमुख राजनीतिक दल की औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर समर्थक और आलोचक दोनों सक्रिय हैं। विश्लेषकों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के बयान, विशेषकर धर्म और राजनीति जैसे विषयों पर, अक्सर व्यापक विमर्श को जन्म देते हैं।

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