लोकसभा में राहुल गांधी के बयान पर हंगामा, गृह मंत्री पर टिप्पणी से बढ़ा विवाद; रिजिजू बोले- माफी के बिना सदन नहीं चलेगा

लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी की गृह मंत्री पर टिप्पणी से हंगामा मच गया। किरेन रिजिजू ने माफी की मांग की, स्पीकर ओम बिरला ने मर्यादित भाषा के इस्तेमाल की सलाह दी और सदन की कार्यवाही 2:30 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।;

Update: 2026-07-29 08:46 GMT

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दसवें दिन लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन, पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर सवाल खड़े किए। उनके भाषण के दौरान गृह मंत्री अमित शाह को लेकर की गई टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने तीखी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में भारी हंगामा शुरू हो गया। बढ़ते विवाद के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2:30 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनियमितताओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। चर्चा पूरी होने के बाद इस विधेयक पर मतदान भी प्रस्तावित है। यदि लोकसभा से विधेयक पारित होता है तो इसे राज्यसभा में भेजा जाएगा।

राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया

विधेयक पर चर्चा शुरू करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि हाल के छात्र आंदोलनों ने देश की शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं से सबसे अधिक नुकसान मेहनत करने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को उठाना पड़ता है, जबकि प्रभावशाली और संपन्न लोग व्यवस्था का लाभ उठा लेते हैं।

उन्होंने कहा कि छात्र अब अपने अधिकारों के लिए खुलकर आवाज उठा रहे हैं और रोजगार, शिक्षा तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए और गृह मंत्री की सदन में अनुपस्थिति पर टिप्पणी की।

गृह मंत्री पर टिप्पणी से सत्ता पक्ष का विरोध

राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री पर लगाए गए आरोप निराधार और आपत्तिजनक हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी पर गंभीर आरोप लगाए जाते हैं तो उनके समर्थन में ठोस साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के नेता को अपने बयान के लिए सदन से माफी मांगनी चाहिए। उनका कहना था कि जब तक माफी नहीं मांगी जाती, सदन का सुचारु संचालन संभव नहीं होगा।

स्पीकर ओम बिरला ने दी मर्यादा बनाए रखने की सलाह

हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कई बार हस्तक्षेप करते हुए राहुल गांधी से संसदीय मर्यादा का पालन करने और विधेयक पर केंद्रित रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिना जांच और प्रमाण के किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना उचित नहीं है।

स्पीकर ने स्पष्ट कहा कि सदन नियमों और प्रक्रियाओं से चलता है, भावनाओं या आक्रोश से नहीं। उन्होंने सभी सदस्यों से मर्यादित और संसदीय भाषा के प्रयोग का आग्रह किया।

राजनाथ सिंह ने असंसदीय शब्द हटाने की मांग की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी राहुल गांधी के भाषण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि किसी असंसदीय शब्द का प्रयोग हुआ है तो उसे सदन की कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी सांसद का अपमान करना नहीं था, बल्कि वह एक उदाहरण के माध्यम से अपनी बात रख रहे थे।

हालांकि सत्ता पक्ष ने उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं किया और लगातार विरोध जारी रखा।

अखिलेश यादव ने उठाया लाठीचार्ज का मुद्दा

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी बहस में हस्तक्षेप करते हुए पूछा कि छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज का आदेश किस स्तर से दिया गया था। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों पर बल प्रयोग हुआ है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई, जिससे सदन का माहौल लगातार गरमाता गया।

शिक्षा व्यवस्था और निजीकरण पर राहुल का हमला

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में लगातार बढ़ते निजीकरण और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग परीक्षाओं में अलग-अलग नियम लागू किए जाते हैं, जिससे छात्रों में असमानता और असंतोष बढ़ता है।

उन्होंने यह भी कहा कि देश के युवाओं को पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की आवश्यकता है। छात्र केवल रोजगार नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण व्यवस्था की भी मांग कर रहे हैं।

बार-बार बाधित हुई कार्यवाही

राहुल गांधी के भाषण के दौरान कई बार सत्ता पक्ष के सांसद अपनी सीटों से खड़े होकर विरोध जताने लगे। जवाब में विपक्षी सांसद भी नारेबाजी करने लगे। लगातार बढ़ते शोर-शराबे के कारण स्पीकर को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

अब सदन में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा पूरी होने के बाद मतदान कराया जाएगा। इसके परिणाम पर देशभर के लाखों छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं।

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