पाक अधिकृत कश्मीर में बढ़ा तनाव, विरोध प्रदर्शनों के बीच बाजार बंद; मानवाधिकारों को लेकर उठे सवाल
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में विरोध प्रदर्शनों और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच तनाव बढ़ गया है। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने स्थिति पर चिंता जताई है।;
नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक तनाव गहराता नजर आ रहा है। ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) द्वारा विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बाद कई इलाकों में बाजार बंद रहे और जनजीवन प्रभावित हुआ। विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने प्रशासनिक नीतियों और स्थानीय मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया, जिससे स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में हुए प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ा है। कई स्थानों पर लोगों ने रैलियां और मार्च निकालकर अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई है। भीमबर और मीरपुर जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जुटने की खबरें सामने आई हैं।
महंगाई और बुनियादी सुविधाओं को लेकर आंदोलन
स्थानीय संगठनों का कहना है कि आंदोलन की शुरुआत आटा, बिजली और अन्य आवश्यक सेवाओं की बढ़ती कीमतों तथा उपलब्धता से जुड़े मुद्दों को लेकर हुई थी। प्रदर्शनकारी लंबे समय से आर्थिक राहत और प्रशासनिक सुधारों की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा, JAAC ने पीओके की विधानसभा में आरक्षित कुछ सीटों को लेकर भी आपत्ति जताई है। संगठन का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था स्थानीय प्रतिनिधित्व को प्रभावित करती है। दूसरी ओर, प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं और कुछ संगठनों तथा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है।
वकीलों और नागरिक संगठनों का विरोध
एक वरिष्ठ वकील की गिरफ्तारी के बाद वकील समुदाय के एक वर्ग ने अदालतों का बहिष्कार किया है। नागरिक संगठनों का कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की जानी चाहिए। वहीं प्रशासन का तर्क है कि सुरक्षा और शांति बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठे मानवाधिकारों के मुद्दे
मानवाधिकार संगठन Amnesty International सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने क्षेत्र की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ ब्रिटिश सांसदों ने भी पाकिस्तान सरकार से संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध, आवाजाही में सीमाएं और बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती जैसे कदमों की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए। दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि ये उपाय सुरक्षा कारणों से उठाए गए हैं।
चुनावों से पहले बढ़ी राजनीतिक गतिविधियां
क्षेत्र में प्रस्तावित चुनावों से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा घटनाक्रम का असर स्थानीय राजनीति और चुनावी माहौल पर पड़ सकता है। फिलहाल सभी पक्षों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और प्रदर्शनकारी समूहों के बीच संवाद के जरिए कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।
स्थिति लगातार बदल रही है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम पर क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहने की संभावना है।
पीओके में पाकिस्तानी सेना का कहर, इंटरनेट भी बंद
रिपोर्ट के अनुसार, रावलकोट इस समय पीओके में फैल रहे विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन गया है। यह विरोध तब तेज हुआ जब प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। पाकिस्तान ने पीओके में प्रस्तावित "लॉन्ग मार्च" से पहले कई सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। आंदोलन से जुड़े नेताओं का आरोप है कि 5 जून की रात से पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं, जिससे संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मार रही पाक सेना
पाकिस्तानी सेना प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मार रही है। स्थानीय कार्यकर्ताओं के हवाले से आई रिपोर्टों में कहा गया है कि आंदोलन के दौरान जेएंडकेजेएएसी के सदस्य शाहजेब हबीब और अमजद कश्मीरी की मौत हो गई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन अब केवल रावलाकोट तक सीमित नहीं है। मुजफ्फराबाद, मीरपुर, टाटा पानी और प्लांदरी समेत कई क्षेत्रों में प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया गया है। प्लांदरी में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रमुख मार्गों को अवरुद्ध किए जाने की भी खबर है।
पीओके को लेकर कई देशों में विरोध प्रदर्शन
पीओके में बिगड़ते हालात को लेकर विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम में एकजुटता प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति का मुद्दा उठाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 9 जून के प्रस्तावित लॉन्ग मार्च और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। रावलाकोट में जारी तनाव और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के कारण पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की स्थिति क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक ध्यान आकर्षित कर सकती है।