पीएम मोदी डिब्रूगढ़ में चाय बागान का किया दौरा, श्रमिकों के साथ चाय की पत्तियां तोड़ीं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ में चाय बागान का दौरा किया, जहां उन्होंने श्रमिकों के साथ चाय की पत्तियां तोड़ीं। इस दौरान पीएम मोदी ने श्रमिकों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और जीवनशैली के बारे में भी जानकारी ली।
डिब्रूगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार की सुबह असम के डिब्रूगढ़ में एक चाय बागान का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां काम करने वाली महिलाओं से आत्मीय बातचीत की और उनके साथ चाय की पत्तियां भी तोड़ीं। पीएम मोदी ने इस अनुभव को बहुत यादगार बताया और कहा कि "चाय असम की आत्मा है"। उन्होंने वहां काम करने वाली महिलाओं के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
प्रधानमंत्री ने डिब्रूगढ़ के मनोहरि रिसॉर्ट में रात बिताने के बाद, वे बुधवार को धेमाजी (गोगामुख) और विश्वनाथ (बेहाली) जिलों में सार्वजनिक रैलियों को संबोधित करने वाले हैं। बता दें कि हाल ही में सरकार ने चाय बागान श्रमिकों के दैनिक वेतन में ₹30 की वृद्धि की है, जो आज से ही प्रभावी होकर ब्रह्मपुत्र घाटी में ₹280 प्रतिदिन हो गई है। इससे पहले 13 मार्च को उन्होंने लगभग 28,000 चाय बागान श्रमिकों को भूमि पट्टे (Land Pattas) भी वितरित किए थे। प्रधानमंत्री का यह दौरा 2026 के असम विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा के प्रचार अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पीएम मोदी ने शेयर की तस्वीरें
प्रधानमंत्री मोदी ने डिब्रूगढ़ के चाय बगान की कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि चाय असम की आत्मा है। यहां की चाय ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। आज सुबह डिब्रूगढ़ में, मैं एक चाय के बगान में गया और वहां काम करने वाली महिलाओं से बातचीत की। यह मेरे लिए एक बहुत ही यादगार अनुभव था।
पीएम मोदी ने आगे लिखा कि चाय की पत्तियां तोड़ने के बाद महिलाएं अपने संस्कृति के बारे में मुझसे बातें करती रहीं और फिर एक सेल्फी भी ली। हम सभी चाय बागान परिवारों के प्रयासों पर बहुत गर्व करते हैं। उनकी मेहनत और लगन ने असम की प्रतिष्ठा को और बढ़ाया है।
Tea is the soul of Assam! The tea from here has made its way across the world.
— Narendra Modi (@narendramodi) April 1, 2026
This morning in Dibrugarh, I went to a tea garden and interacted with women working here. It was a very memorable experience. pic.twitter.com/2VZufAAZ0h
असम के चाय बगान में 10 लाख से अधिक श्रमिक
असम में चाय बागान उद्योग देश का सबसे बड़ा नियोजक है, जिसमें 10 लाख से अधिक श्रमिक सीधे कार्यरत हैं। ये श्रमिक राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 20% हिस्सा हैं और मुख्य रूप से जनजातीय समुदायों से आते हैं। 10 लाख से अधिक स्थाई और अस्थाई श्रमिक चाय की पत्तियों को तोड़ने, बागान प्रबंधन और कारखानों में काम करते हैं। चाय उद्योग में कार्यरत कार्यबल में महिलाओं की संख्या 50% से अधिक है। सबसे अधिक चाय श्रमिक और बागान ऊपरी असम के डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, जोरहाट, शिवसागर और सोनितपुर जिले से आते हैं। काम के व्यस्त सीजन (पिक सीजन) के दौरान अस्थाई श्रमिकों की भी भारी संख्या में भर्ती की जाती है।
800 से अधिक पंजीकृत चाय बागान
2025 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 3.33 लाख से अधिक चाय बागान मजदूर 'लेबर लाइन' या लेबर कॉलोनी में बिना किसी स्पष्ट जमीन अधिकार के रहते हैं, जिन्हें जमीन का अधिकार देने के लिए हाल ही में कानून पारित किया गया है। असम की चाय उद्योग में 800 से अधिक पंजीकृत चाय बागान हैं जो इस विशाल कार्यबल को आजीविका प्रदान करते हैं।
असम में कब हैं चुनाव?
ध्यान हो कि असम में इसी 9 अप्रैल को चुनाव हैं। नतीजे 4 मई को घोषित होंगे। सत्ता में बीजेपी की सरकार है। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के पास अपने दम पर पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने की चुनौती है तो वहीं कांग्रेस भी उसे सीधी टक्कर देती नजर आ रही है। इस बीच पीएम मोदी का चाय बागान जाकर तस्वीरें खिंचाने का मतलब साफ है कि बीजेपी यह बताना चाहती है कि वहां के चाय बागानों में काम करने वाले लोगों के साथ पार्टी पूरी मजबूती से खड़ी है।