दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद हाई कोर्ट से राहत, मां की देखभाल और मामा के 'चेहलुम' के लिए 3 दिन की जमानत
साल 2020 के दिल्ली दंगे की साजिश के मामले में यूएपीए के तहत गिरफ्तार पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद को दिल्ली हाई कोर्ट ने तीन दिन की अग्रिम जमानत दे दी है।;
कड़कड़डूमा कोर्ट ने खारिज की थी याचिका
दिल्ली की एक अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद खालिद ने हाई कोर्ट का रुख किया था। उमर खालिद ने अपने दिवंगत मामा के चेहलुम में शामिल होने और बीमार मां की देखभाल के लिए 15 दिनों की अंतरिम जमानत मांगी है। इससे पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था कि अंतरिम जमानत के लिए दिए गए कारण उचित और संतोषजनक नहीं हैं।
मां की देखभाल के लिए मांगी जमानत
उमर खालिद ने निचली अदालत में दलील दी थी कि उनके परिवार में पिता, मां और पांच बहनें हैं, लेकिन 71 वर्षीय पिता मां की देखभाल करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि उनकी चार बहनें शादीशुदा हैं और अलग-अलग जगहों पर रहती हैं। ऐसे में परिवार के सबसे बड़े और इकलौते बेटे होने के नाते वही अपनी मां की सर्जरी से पहले और बाद में देखभाल कर सकते हैं।
याचिका में यह भी कहा गया था कि उमर खालिद को पहले भी कई बार अंतरिम जमानत मिल चुकी है और उन्होंने हर बार अदालत की सभी शर्तों का पालन करते हुए समय पर सरेंडर किया। बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी थी कि सह-आरोपी तस्लीम अहमद, शिफा उर रहमान और अथर खान को भी पारिवारिक बीमारी जैसे आधारों पर अंतरिम जमानत मिली, इसलिए समानता के आधार पर उमर खालिद को भी राहत मिलनी चाहिए।