पेपर लीक संशोधन विधेयक को मोदी कैबिनेट की मंजूरी, 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान
पेपर लीक पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला। कैबिनेट ने संशोधन विधेयक को मंजूरी दी। दोषियों के लिए 10 साल की जेल, 10 करोड़ रुपये जुर्माना और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान।;
फास्ट ट्रैक कोर्ट को मिलेगा कानूनी आधार
सरकार के प्रस्तावित संशोधनों में पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट को कानूनी आधार देने का प्रावधान किया गया है। इन अदालतों को निर्देश होगा कि ऐसे मामलों का निपटारा निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाए, ताकि वर्षों तक मुकदमे लंबित न रहें। सरकार का मानना है कि त्वरित न्याय से परीक्षा माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति या संगठित गिरोह पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी या उससे जुड़े अपराधों का दोषी पाया जाता है तो उसे अधिकतम 10 वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। यह प्रावधान अब तक के सबसे कठोर दंडात्मक उपायों में शामिल माना जा रहा है।
अगले सप्ताह संसद में पेश हो सकता है विधेयक
सरकारी सूत्रों के अनुसार, संशोधन विधेयक को अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाने की तैयारी है। मानसून सत्र के दौरान इस पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हाल के दिनों में परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक को लेकर संसद के दोनों सदनों में लगातार हंगामा देखने को मिला है। सरकार का कहना है कि नए कानून से परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाएगा।
पीएम मोदी ने दिया था सख्त संदेश
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि पेपर लीक केवल एक कानूनी नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार ने दोषियों की गिरफ्तारी, दोबारा परीक्षा आयोजित कराने और समय पर परिणाम घोषित करने जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन केवल इतना पर्याप्त नहीं है। इसलिए अब सख्त कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है।
शिक्षा मंत्रालय में भी हुआ बड़ा प्रशासनिक बदलाव
परीक्षा प्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय में भी अहम प्रशासनिक बदलाव किए हैं। उच्च शिक्षा विभाग में नए सचिव की नियुक्ति की गई है। सरकार का कहना है कि प्रशासनिक सुधार, तकनीकी निगरानी और सख्त कानून के जरिए परीक्षा व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय बनाया जाएगा।
उधर, पेपर लीक के मुद्दे पर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर चुके हैं, जबकि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे संगठन अब भी शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और सुधार की मांग पर अड़े हुए हैं। सरकार का दावा है कि नए कानूनी प्रावधान भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।