'हमारे हक का पानी रोका तो हाथ काट देंगे', सिंधु जल संधि पर हेकड़ी निकली तो अब भारत को गीदड़भभकी दे रहा पाकिस्तान
सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक का विवादित बयान सामने आया। भारत के समझौता स्थगित करने के फैसले के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।;
पाकिस्तानी समाचार चैनल एआरवाई (ARY) को दिए गए इंटरव्यू में मुसादिक मलिक का यह बयान सामने आया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे भारत के फैसले के संदर्भ में देखा जा रहा है।
सूचना मंत्री ने भी भारत पर साधा निशाना
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी सिंधु जल समझौते को लेकर भारत की आलोचना की। पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश का नेतृत्व यह कह रहा है कि पाकिस्तान तक पानी नहीं पहुंचने दिया जाएगा। तरार ने दावा किया कि सिंधु जल समझौते जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते को कोई भी पक्ष एकतरफा समाप्त या निरस्त नहीं कर सकता।
पाकिस्तानी सरकार का कहना है कि इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कानून और संधि प्रावधानों के तहत देखा जाना चाहिए।
भारत ने आतंकवाद पर अपनाया है सख्त रुख
भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए हैं। इन्हीं में सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का फैसला भी शामिल है। भारत का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में सामान्य द्विपक्षीय संबंध संभव नहीं हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि "आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते, और खून तथा पानी एक साथ नहीं बह सकते।" भारत का मानना है कि आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति अपनाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
रक्षामंत्री भी दोहरा चुके हैं सरकार का रुख
हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के बाद लिया गया फैसला भारत की सुरक्षा नीति का हिस्सा है और सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है।
भारत ने यह भी संकेत दिया है कि सीमा पार आतंकवाद समाप्त होने तक पाकिस्तान के साथ संबंधों की समीक्षा इसी दृष्टिकोण से की जाएगी।
बढ़ी कूटनीतिक तल्खी
सिंधु जल समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी से कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी चर्चा का विषय बन सकता है।
फिलहाल भारत अपने फैसले पर कायम है, जबकि पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।