मानसून सत्र पर कांग्रेस का हमला, कहा- विपक्षी एकता से सरकार को बैकफुट पर लाए

जयराम रमेश ने कहा,परिसीमन, एफसीआरए, शिक्षा अधिष्ठान, वन नेशन वन इलेक्शन तथा मंत्रियों की स्वत: बर्खास्तगी बिल रोकना रही विपक्ष की उपलब्धि।;

Update: 2026-08-14 07:24 GMT

नई दिल्ली : Parliament Monsoon Session: मानसून सत्र समाप्त होने के बाद कांग्रेस ने संसद की कार्यवाही बाधित रहने के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी ने दावा किया कि सरकार कई अहम मुद्दों पर सवालों का सामना करने से बचती रही और विपक्ष के दबाव के चलते उसे कई प्रस्तावित विधेयकों को आगे बढ़ाने से पीछे हटना पड़ा। कांग्रेस ने इसे विपक्षी एकजुटता की बड़ी सफलता बताया, जबकि बिना पर्याप्त चर्चा के कुछ विधेयकों के पारित होने को अपने लिए झटका माना। कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश और लोकसभा में पार्टी के उपनेता गौरव गोगोई ने सत्र समाप्त होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इस पूरे सत्र में रक्षात्मक नजर आई और विपक्ष के सवालों का सामना करने से बचती रही।

पांच मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को रोका

जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने सत्र के पहले दिन से आखिरी दिन तक एकजुट होकर रणनीति बनाई। उनके मुताबिक इस एकजुटता के कारण विपक्ष को पांच महत्वपूर्ण मामलों में सरकार को पीछे हटने के लिए मजबूर करने में सफलता मिली। कांग्रेस के अनुसार वन नेशन, वन इलेक्शन से जुड़ा विधेयक शीतकालीन सत्र तक टाल दिया गया। पार्टी का दावा है कि संसदीय समिति में विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के कारण सरकार इसे तत्काल आगे नहीं बढ़ा सकी। इसी तरह विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 की रिपोर्ट भी आगे नहीं बढ़ी। कांग्रेस ने इसे भी विपक्ष के दबाव का परिणाम बताया। इसके अलावा प्रधानमंत्री और मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद 30 दिन में स्वत: बर्खास्तगी से संबंधित प्रस्तावित विधेयक को भी सत्र में आगे नहीं लाया जा सका।

FCRA बिल पर JPC भेजना बताया उपलब्धि

जयराम रमेश ने FCRA विधेयक का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार इस विधेयक को वापस लेने की मांग कर रहा था। हालांकि विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजे जाने को कांग्रेस ने विपक्ष और उन लोगों की सफलता बताया, जिन्होंने इसके प्रावधानों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में व्यापम घोटाले के मुद्दे पर संसद का मानसून सत्र प्रभावित हुआ था। इस बार NEET पेपर लीक का मुद्दा भी सदन में विपक्ष के लिए प्रमुख रहा और कांग्रेस ने इसे छात्रों से जुड़ा गंभीर सवाल बताया।

परिसीमन को लेकर सरकार पर बड़ा आरोप

कांग्रेस ने परिसीमन के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने बहुमत जुटाने के लिए विपक्षी दलों के सांसदों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। उन्होंने शिवसेना यूबीटी और तृणमूल कांग्रेस के सांसदों से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करते हुए दावा किया कि परिसीमन से संबंधित संवैधानिक बदलाव के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश की गई। कांग्रेस का कहना है कि तमिलनाडु विधानसभा द्वारा परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद सरकार के लिए जरूरी समर्थन हासिल करना आसान नहीं होगा। हालांकि रमेश ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लापरवाह नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि सरकार अचानक कोई कदम उठा सकती है, इसलिए विपक्ष को अपनी एकता बनाए रखनी होगी।

NEET और मंदिर चंदा मामले पर सरकार को घेरा

गौरव गोगोई ने NEET पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और श्रीराम मंदिर में चंदा चोरी के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से इन मुद्दों पर जवाब मांगता रहा, लेकिन उनकी ओर से सदन में पर्याप्त जवाब नहीं मिला। गोगोई ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी छात्रों के समर्थन में विपक्ष के दबाव का हिस्सा बताया। कांग्रेस ने दावा किया कि इन मुद्दों पर सरकार को लगातार घेरने से विपक्ष ने छात्रों से जुड़े सवालों को संसद के केंद्र में बनाए रखा।

कुछ विधेयकों का पारित होना विपक्ष के लिए झटका

कांग्रेस ने जहां कई प्रस्तावित विधेयकों को रोकने को अपनी उपलब्धि बताया, वहीं सहकारिता तथा माइंस एंड मिनरल्स से जुड़े विधेयकों का बिना पर्याप्त चर्चा पारित होना विपक्ष के लिए झटका माना। पार्टी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि महत्वपूर्ण कानूनों पर व्यापक संसदीय बहस होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि मानसून सत्र ने सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को और स्पष्ट किया है। पार्टी अब विपक्षी एकता को आगे भी बनाए रखने और आगामी सत्रों में सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति पर जोर देगी।

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