सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान की फिर धमकी, शहबाज बोले- पानी रोकने की कोशिश का देंगे जवाब

सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी के बंटवारे से जुड़ी एक महत्वपूर्ण संधि है। इस समझौते पर 19 सितंबर 1960 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे।;

Update: 2026-08-14 09:59 GMT

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर भारत को एक बार फिर चेतावनी दी है। इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि अगर भारत ने पाकिस्तान के पानी को रोकने या उसके प्रवाह को कम करने की कोशिश की तो पाकिस्तान उसका जवाब देगा। शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में कश्मीर मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का रुख नहीं बदला है। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की भी तारीफ की और दावा किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने भारत को हराया।

पहलगाम हमले के बाद भारत ने उठाया बड़ा कदम

सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के पानी के बंटवारे से जुड़ी एक महत्वपूर्ण संधि है। इस समझौते पर 19 सितंबर 1960 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों को दो हिस्सों में बांटा गया। पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज के पानी के इस्तेमाल का अधिकार भारत को मिला, जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी का मुख्य अधिकार पाकिस्तान को दिया गया। यह समझौता दशकों तक दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे का आधार बना रहा। हालांकि, अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला किया। इसके बाद से यह मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।

65 साल बाद निलंबित हुई संधि

सिंधु जल समझौता करीब 65 वर्षों तक जारी रहा। भारत के निलंबन के बाद पाकिस्तान ने इस कदम का विरोध किया और संधि को एकतरफा तरीके से रोकने के अधिकार पर सवाल उठाए। पाकिस्तान का कहना है कि यह समझौता अब भी कानूनी रूप से प्रभावी है और भारत इसे अपनी मर्जी से निलंबित नहीं कर सकता। वहीं, भारत का रुख स्पष्ट है कि सीमा पार आतंकवाद और सिंधु जल समझौते को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस, विश्वसनीय और प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि को निलंबित रखने का फैसला जारी रहेगा।

पानी के मुद्दे पर बढ़ता तनाव

सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि भारत की ओर से संधि को निलंबित किए जाने के बाद पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाता रहा है। दूसरी ओर, भारत ने आतंकवाद को लेकर अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता दी है। ऐसे में दोनों देशों के बीच पानी का विवाद अब केवल नदी जल बंटवारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक राजनीतिक और सुरक्षा तनाव से भी जुड़ गया है। शहबाज शरीफ का ताजा बयान इसी तनाव के बीच आया है। उनके बयान से साफ है कि पाकिस्तान सिंधु जल समझौते को लेकर भारत के फैसले को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच पानी और आतंकवाद से जुड़े मुद्दे द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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