नेपाल त्रासदी के 10 दिन बाद भी खत्म नहीं हुई तलाश, 1400 से ज्यादा मौतें; लापता लोगों की उम्मीद धूमिल
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के 10 दिन बाद भी राहत-बचाव अभियान जारी है। 1400 से ज्यादा मौतों की पुष्टि हुई है और सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।;
वहीं, लंबे समय से अपने परिजनों की तलाश कर रहे कुछ परिवारों ने अब प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार का सहारा लिया है। बताया जा रहा है कि कई जगहों पर लापता लोगों की याद में पुतले जलाकर अंतिम क्रिया की जा रही है। यह स्थिति आपदा की भयावहता और प्रभावित परिवारों की पीड़ा को दर्शाती है।
सड़क, पुल और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान
सरकार की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल के कई हिस्सों में सड़कें, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन के बाद अचानक आई बाढ़ ने उत्तर और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया था।
कई इलाकों में मलबा और कीचड़ जमा होने के कारण राहत-बचाव अभियान अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सुरंगों और जलविद्युत परियोजनाओं के आसपास फंसे लोगों की तलाश के लिए विशेष तकनीकी मदद की जरूरत पड़ रही है।
भारत ने भेजी एनडीआरएफ की तकनीकी टीम
आपदा प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य में नेपाल की मदद के लिए भारत ने एनडीआरएफ की 11 सदस्यीय तकनीकी टीम भेजी है। अधिकारियों के मुताबिक, कमांडर के नेतृत्व वाली यह टीम रोप रेस्क्यू तकनीक में स्थानीय बचाव दलों की मदद कर रही है।
एनडीआरएफ के विशेषज्ञ कीचड़ और मलबे से भरी सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में भी स्थानीय टीमों का सहयोग कर रहे हैं। भारत की ओर से करीब 95 टन राहत सामग्री भी नेपाल भेजे जाने की जानकारी दी गई है।
275 भारतीय अब भी लापता
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में बाढ़ के बाद कम से कम 275 भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं, जबकि 166 भारतीयों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। सरकार प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखने में जुटी है।
पर्यटन क्षेत्र को हुए नुकसान का भी आकलन
नेपाल सरकार अब आपदा से प्रभावित पर्यटन क्षेत्रों में हुए नुकसान का आकलन कर रही है। प्रभावित रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और गोरखा जिलों में पर्यटन सेवा प्रदाताओं को हुए नुकसान की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही वैकल्पिक सड़क और ट्रेकिंग मार्ग तलाशने तथा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
सरकार कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए वैकल्पिक सीमा बिंदु खोलने की कूटनीतिक संभावनाओं पर भी विचार कर रही है। फिलहाल प्राथमिकता राहत-बचाव, लापता लोगों की तलाश और प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने की है।