वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की एक बेहद सुरक्षित भूमिगत साइट पिकएक्स माउंटेन को लेकर कड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने 4 सितंबर को कहा कि अगर इस साइट पर किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि नजर आती है तो अमेरिका उस पर जल्द हमला कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस स्थान पर होने वाली गतिविधियों और वहां आने-जाने वालों पर लगातार नजर रख रही हैं। ट्रंप के मुताबिक, ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान का प्रमुख उद्देश्य उसे परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। उन्होंने दावा किया कि महीनों से चल रही कार्रवाई के बावजूद ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा।
नतांज के पास मौजूद है भूमिगत साइट
पिकएक्स माउंटेन को ईरान में कू-ए-कोलांग के नाम से जाना जाता है। यह देश के प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्र नतांज के दक्षिण में स्थित है। नतांज को ईरान के परमाणु कार्यक्रम का अहम केंद्र माना जाता है और यहां पहले भी अमेरिका तथा इजराइल की सैन्य कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं। पिकएक्स माउंटेन की खासियत इसकी भूमिगत संरचना है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यहां पहाड़ के भीतर गहरी सुरंगों वाले दो कॉम्प्लेक्स हैं। इसका मुख्य हिस्सा जमीन की सतह से करीब 100 मीटर नीचे होने का अनुमान लगाया गया है। साइट के चार प्रवेश द्वार बताए जाते हैं, जिनमें दो पूर्व और दो पश्चिम दिशा में हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों से निर्माण के संकेत
सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से इस क्षेत्र में लगातार निर्माण गतिविधियों के संकेत मिलने की बात सामने आई है। 30 जून 2026 की तस्वीरों में पश्चिमी प्रवेश द्वार के पास निर्माण से जुड़े वाहन दिखाई देने की जानकारी दी गई थी। इसके अलावा साइट तक पहुंचने वाली सड़कों और सुरंगों के प्रवेश बिंदुओं पर भी हाल के महीनों में काम होने की रिपोर्टें सामने आई हैं। हालांकि, इस परिसर का वास्तविक इस्तेमाल अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ईरान ने भी यहां परमाणु गतिविधि होने के दावों से इनकार किया है।
हजारों सेंट्रीफ्यूज होने का दावा
पिकएक्स माउंटेन को लेकर सबसे ज्यादा सवाल ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इजराइली खुफिया आकलन के हवाले से दावा किया गया है कि ईरान ने यहां बड़ी संख्या में सेंट्रीफ्यूज पहुंचाए हैं। सेंट्रीफ्यूज का इस्तेमाल यूरेनियम संवर्धन के लिए किया जाता है। रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया है कि ईरान ने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का कुछ हिस्सा इस परिसर में रखा हो सकता है। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 22 जुलाई को कहा था कि पिकएक्स माउंटेन में कोई परमाणु गतिविधि नहीं चल रही है।
नतांज के विकल्प के तौर पर बना परिसर?
विशेषज्ञों के बीच यह संभावना भी जताई जाती रही है कि पिकएक्स माउंटेन को नतांज में 2020 में क्षतिग्रस्त हुई उन्नत सेंट्रीफ्यूज असेंबली सुविधा के विकल्प के तौर पर विकसित किया जा रहा है। सितंबर 2020 में ईरान के परमाणु संगठन के तत्कालीन प्रमुख अली अकबर सालेही ने भी पहाड़ों के भीतर एक ज्यादा आधुनिक और बड़ी सुविधा बनाए जाने की बात कही थी।
गहराई के कारण अमेरिका के लिए चुनौती
इस भूमिगत परिसर पर हमला अमेरिका के लिए आसान नहीं माना जा रहा है। इसकी अनुमानित गहराई और सुरंगों की संरचना इसे सामान्य हवाई हमलों से बचाने में मदद कर सकती है। अमेरिका के पास GBU-57 जैसे शक्तिशाली बंकर-बस्टर हथियार हैं, जिनका इस्तेमाल गहरी भूमिगत संरचनाओं को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि पिकएक्स माउंटेन के अंदर मौजूद सभी हिस्सों को पूरी तरह नष्ट करना कठिन हो सकता है। खास तौर पर सुरंगों का सटीक नक्शा उपलब्ध न होने की स्थिति में सैन्य अभियान की चुनौती और बढ़ जाती है।