राज्यसभा चुनाव के बाद मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल संभव, एक दर्जन मंत्रियों में बदलाव की चर्चा
राज्यसभा चुनाव 2026 के बाद मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की अटकलें तेज हैं। कई मंत्रालयों में बदलाव, नए चेहरों की एंट्री और NDA सहयोगी दलों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की चर्चा है।;
रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों और संगठनात्मक रणनीति को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट में बदलाव पर विचार कर रही है। चर्चा है कि कम से कम दो केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और तीन राज्य मंत्री मंत्रिपरिषद से बाहर हो सकते हैं। वहीं कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठन में नई जिम्मेदारियां दिए जाने की भी संभावना जताई जा रही है।
सहयोगी दलों को मिल सकती है अधिक भागीदारी
एनडीए के प्रमुख सहयोगी दलों को सरकार में अधिक प्रतिनिधित्व देने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। माना जा रहा है कि जनता दल यूनाइटेड, तेलुगु देशम पार्टी, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे दलों को मंत्रिपरिषद में अतिरिक्त स्थान मिल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार और आंध्र प्रदेश में सहयोगी दलों की मजबूत भूमिका को देखते हुए उन्हें केंद्र सरकार में अधिक भागीदारी दी जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में सरकार या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
कई मंत्रालयों में बदलाव की संभावना
सूत्रों के अनुसार रेलवे, वित्त, कॉर्पोरेट मामलों, कोयला, वस्त्र, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी, ग्रामीण विकास, रसायन एवं उर्वरक, सहकारिता, मत्स्य पालन, जल शक्ति, कृषि, पर्यावरण और कानून जैसे मंत्रालयों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
इसके अलावा पार्टी संगठन में भी नई नियुक्तियों पर विचार किया जा सकता है। चर्चा यह भी है कि कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियां देकर सरकार में नए चेहरों को अवसर दिया जा सकता है।
राज्यसभा चुनाव पर टिकी नजर
18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में कुल 26 सीटों के लिए मतदान होना है। इनमें आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीटें, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीटें, झारखंड की दो सीटें तथा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की एक-एक सीट शामिल हैं। महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी एक-एक सीट पर उपचुनाव होगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद केंद्र सरकार अपने राजनीतिक और संगठनात्मक संतुलन को मजबूत करने के लिए कैबिनेट में बदलाव कर सकती है। हालांकि, अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व और प्रधानमंत्री कार्यालय के स्तर पर ही लिया जाएगा।