'राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो गई है', चुनावी राजनीति से सिद्धारमैया का संन्यास; 2028 का चुनाव नहीं लड़ेंगे
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया। उन्होंने राजनीति में बढ़ते भ्रष्टाचार, चुनावी खर्च और उम्र का हवाला देते हुए चुनावी राजनीति से संन्यास लेने का फैसला किया।;
बेंगलुरु।कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सक्रिय चुनावी राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह वर्ष 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आज राजनीति पूरी तरह भ्रष्ट हो चुकी है और चुनाव लड़ने के लिए नेताओं को पैसा खर्च करना पड़ता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव नहीं लड़ने के बावजूद वह सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय रहेंगे तथा जनता की आवाज उठाते रहेंगे।
2028 का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला
सिद्धारमैया ने कहा कि उनके समर्थक और वरुणा विधानसभा क्षेत्र के लोग लगातार उन्हें अगला चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य में कोई भी चुनाव नहीं लड़ने का अंतिम निर्णय ले लिया है। उन्होंने कहा कि पहले चुनाव जनता के सहयोग और विश्वास से लड़े जाते थे, लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि जब वह पहले चुनाव लड़ते थे, तब क्षेत्र की जनता स्वयं चुनावी खर्च के लिए सहयोग करती थी। आज हालात ऐसे हो गए हैं कि उम्मीदवारों को मतदाताओं तक पहुंचने के लिए भारी धन खर्च करना पड़ता है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
उम्र और स्वास्थ्य का भी दिया हवाला
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी उम्र अब 79 वर्ष हो चुकी है। वर्ष 2028 तक वह 81-82 वर्ष के हो जाएंगे और तब तक उनके सार्वजनिक जीवन के करीब 50 वर्ष पूरे हो जाएंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि अब पहले जैसी ऊर्जा और स्वास्थ्य नहीं रहा, इसलिए चुनावी राजनीति से अलग होना उचित निर्णय है।
उन्होंने बताया कि उनका राजनीतिक सफर 1978 में तालुक बोर्ड के सदस्य के रूप में शुरू हुआ था। पिछले पांच दशकों में उन्होंने जीत और हार दोनों का सामना किया, लेकिन हमेशा अपने सिद्धांतों और विचारों से समझौता नहीं किया।
'जनता की सेवा जारी रहेगी'
सिद्धारमैया ने कहा कि चुनावी राजनीति छोड़ने का मतलब सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता ने उन्हें वर्षों तक स्नेह और विश्वास दिया है, जिसका ऋण वह कभी नहीं चुका सकते। इसलिए अपने शेष जीवन में भी वह लोगों के अधिकारों और जनहित के मुद्दों के लिए काम करते रहेंगे।
कर्नाटक कांग्रेस में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज
सिद्धारमैया के इस बयान के बीच कर्नाटक में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही नए मंत्रियों के नामों पर अंतिम फैसला ले सकता है। बताया जा रहा है कि कई विधायक मंत्री बनने की दौड़ में हैं और पार्टी के शीर्ष नेता इस विषय पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
सिद्धारमैया के चुनावी राजनीति से हटने के फैसले को कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, हालांकि उन्होंने साफ कर दिया है कि वह कांग्रेस और जनता के बीच अपनी सक्रिय भूमिका पहले की तरह निभाते रहेंगे।