SIR रद्द करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग, एमके स्टालिन ने राष्ट्रपति को भेजी याचिका
डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को याचिका भेजकर SIR रद्द करने, बैलेट पेपर से चुनाव कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।;
नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विवाद तेज हो गया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के अध्यक्ष और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को याचिका भेजकर SIR प्रक्रिया रद्द करने और चुनाव में बैलेट पेपर की व्यवस्था दोबारा लागू करने की मांग की है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई है।
स्टालिन ने मतदाता सूची से कथित तौर पर 97 लाख नाम हटाए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने के कारणों की जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि नाम हटाए जाने का चुनाव परिणामों पर कोई असर पड़ा या नहीं।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग
स्टालिन की याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के कथित पक्षपातपूर्ण आचरण को लेकर संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 86(2) के तहत संसदीय संदर्भ शुरू करने की मांग का भी उल्लेख किया गया है। स्टालिन ने तमिलनाडु में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले की समीक्षा के लिए अनुच्छेद 143 के तहत सुप्रीम कोर्ट से राय लेने की अपील भी की है। इन मांगों पर संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
SIR से पहले की मतदाता सूची बहाल करने की मांग
डीएमके प्रमुख ने मांग की है कि SIR प्रक्रिया से पहले की मतदाता सूची बहाल की जाए। उनका तर्क है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
स्टालिन ने कहा कि मतदान केवल विशेषाधिकार नहीं, बल्कि संविधान से जुड़ा महत्वपूर्ण अधिकार है। इसलिए हर पात्र मतदाता का नाम सूची में होना और उसके वोट की गणना सुनिश्चित करना जरूरी है।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
स्टालिन ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई है। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
SIR और चुनाव प्रणाली को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियों के बीच यह मांग राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आंकड़ों, उनके कारणों और चुनाव परिणामों पर संभावित प्रभाव का आकलन आधिकारिक दस्तावेजों तथा जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।