मेरठ सर्पदंश हत्याकांड: पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड, पति की हत्या कर बिस्तर पर छोड़ा था जिंदा सांप

मेरठ के चर्चित सर्पदंश हत्याकांड में अदालत ने अमित कश्यप की हत्या के मामले में पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड सुनाया। जानिए कैसे सांप के काटने से मौत दिखाने की साजिश का खुलासा हुआ।;

Update: 2026-10-16 10:18 GMT
मेरठः उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित सर्पदंश हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव निवासी अमित कश्यप उर्फ मिक्की कश्यप की हत्या के मामले में उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड की सजा दी गई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-12) जयवीर सिंह नागर की अदालत ने दोनों को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराने के बाद यह फैसला सुनाया। आरोपियों पर हत्या को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की साजिश रचने का आरोप था।

बिस्तर पर मिला था शव, नीचे दबा था जिंदा सांप

यह घटना 13 अप्रैल 2025 की है। उस सुबह अमित का शव उसके बिस्तर पर मिला था। शव के नीचे एक जिंदा घोड़ा पछाड़ सांप दबा हुआ था। उसके शरीर पर सांप के काटने के 10 निशान भी बताए गए थे। शुरुआत में पत्नी रविता ने दावा किया कि अमित की मौत सर्पदंश से हुई है।

हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने मामले को नया मोड़ दिया। रिपोर्ट के अनुसार, अमित की मौत दम घुटने से हुई थी। जांच में गला, नाक और मुंह दबाए जाने के संकेत मिले। गर्दन की हायॉइड हड्डी और थायरॉइड कार्टिलेज टूटने की बात भी सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने हत्या के पहलू से जांच आगे बढ़ाई।

प्रेम संबंधों में बाधा बनने पर हत्या की साजिश

पुलिस जांच के मुताबिक, रविता और अमरदीप के बीच प्रेम संबंध थे। अमित को इसकी जानकारी मिलने और विरोध करने के बाद दोनों ने कथित तौर पर उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

जांच में सामने आया कि 12 अप्रैल 2025 की रात सोते समय अमित के हाथ पकड़े गए और उसका गला घोंट दिया गया। इसके बाद हत्या को सर्पदंश का मामला दिखाने के लिए बिस्तर पर जिंदा सांप छोड़ दिया गया।

पुलिस के अनुसार, घटना के 24 घंटे के भीतर रविता और अमरदीप के बीच 51 बार फोन पर बातचीत हुई थी। अमरदीप ने कथित तौर पर माता के जागरण का बहाना बनाकर सपेरे कृष्ण से एक हजार रुपये में सांप खरीदा था। कृष्ण को यह सांप अपने नाना प्रीतमनाथ से मिला था।

भाई की शिकायत से शुरू हुई जांच

अमित के भाई मोनू कश्यप ने 16 अप्रैल 2025 को रविता और अमरदीप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद 26 जून 2025 को आरोप-पत्र अदालत में दाखिल किया।

मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह पेश किए। इनमें अमित का भाई, मां मुनेश देवी, चिकित्सक, पुलिस अधिकारी और सांप उपलब्ध कराने से जुड़े गवाह शामिल थे। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।

फैसले के बाद भावुक हुईं अमित की मां

फैसला सुनाए जाने के बाद अमित की मां मुनेश देवी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे की हत्या के मामले में अब न्याय मिला है। सजा सुनाने से पहले न्यायाधीश ने मनुस्मृति और सावित्री के प्रसंग का भी उल्लेख किया।

अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। मृत्युदंड के फैसले के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया और संभावित अपील की स्थिति पर भी नजर रहेगी।

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