दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित होने का आरोप, खान मार्केट के व्यापारी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे; उपराज्यपाल को चिट्ठी

दिल्ली में CJP के प्रदर्शनों से कारोबार और आजीविका प्रभावित होने का दावा करते हुए खान मार्केट एसोसिएशन और किराना कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। व्यापारी संगठनों ने LG से जंतर-मंतर के लिए वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल तय करने की मांग की है।;

Update: 2026-10-16 06:09 GMT

नई दिल्ली। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों को लेकर व्यापारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शनों से कारोबार, आम लोगों की आवाजाही और सुरक्षा प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए खान मार्केट एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। वहीं, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ और खान मार्केट के व्यापारी संगठनों ने दिल्ली के उपराज्यपाल को संयुक्त पत्र लिखकर जंतर-मंतर को नियमित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने और किसी बड़े खुले मैदान में प्रदर्शन कराने की मांग की है।

व्यापारियों का दावा- ग्राहकों का बाजार पहुंचना मुश्किल

व्यापारी संगठनों का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान बैरिकेडिंग, सड़क बंद होने और यातायात के रास्ते बदले जाने से आसपास के बाजारों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इससे दुकानों, होटलों और रेस्टोरेंट के कारोबार पर असर पड़ता है। व्यापारियों के मुताबिक, सामान की आपूर्ति और कर्मचारियों की आवाजाही भी बाधित होती है।

उपराज्यपाल को भेजे गए पत्र में जुलाई 2026 और 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों का उल्लेख किया गया है। व्यापारियों ने दावा किया कि 23 जुलाई को कनॉट प्लेस के कारोबारियों को शाम 6:30 बजे तक दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान बंद करने की सलाह दी गई थी, जिससे व्यापार प्रभावित हुआ।

सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं पर भी चिंता

पत्र में व्यापारियों ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि भगदड़, आग या किसी अन्य आपात स्थिति में लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। भीड़ और यातायात प्रतिबंधों के कारण एंबुलेंस तथा दमकल की गाड़ियों को रास्ता मिलने में भी परेशानी हो सकती है।

व्यापारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति के अधिकार के खिलाफ नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रदर्शन के अधिकार के साथ आम लोगों की सुरक्षा, आवाजाही और कारोबार करने के अधिकार का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

LG के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें

व्यापारी संगठनों ने उपराज्यपाल से जंतर-मंतर की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग की है। साथ ही, जंतर-मंतर को नियमित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने और रामलीला मैदान या बुराड़ी के उपयुक्त खुले मैदानों में प्रदर्शन कराने पर विचार करने को कहा है। उन्होंने अपने प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के लिए समय देने की मांग भी की है।

पत्र की प्रतियां दिल्ली पुलिस आयुक्त, दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी भेजे जाने की बात कही गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने छोटे दुकानदारों की आजीविका पर जताई चिंता

दिल्ली किराना कमेटी ने भी प्रदर्शन से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि NDMC ने सेंट्रल पार्क बंद कर दिया है, जिससे रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे व्यापारियों के कामकाज पर असर पड़ सकता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले से संबंधित मुद्दे पर सुनवाई कर रहा है और अलग-अलग याचिकाओं में प्रदर्शन के अधिकार तथा उसके विरोध से जुड़े समान सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने छोटे दुकानदारों की आजीविका पर निर्भर परिवारों की मुश्किलों को समझने की जरूरत बताई।

अदालत ने संकेत दिया कि यदि NDMC के आदेश से कारोबार को नुकसान होता है, तो इस मुद्दे पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल विवाद के केंद्र में प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की आजीविका के बीच संतुलन बनाने का सवाल है।

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