संसद का विशेष सत्र इसी महीने बुला सकती है सरकार, परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर नजर
संसद का विशेष सत्र इसी महीने बुलाए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने की तैयारी में है। BRICS संसदीय फोरम को देखते हुए तारीखें तय हो सकती हैं।;
नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। इस सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक विशेष सत्र की तारीखों या एजेंडे को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों का दावा है कि इन महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए आवश्यक संख्या जुटाने की संभावना है। इसके लिए कुछ सहयोगी दलों के साथ-साथ विपक्ष के छोटे दलों से भी संपर्क साधा जा रहा है।
परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर सरकार की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से संबंधित प्रस्तावों को आगे बढ़ाने के लिए राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश कर रही है। इन मुद्दों पर संविधान संशोधन की आवश्यकता और संबंधित विधेयकों के प्रावधानों को लेकर संसद में चर्चा होने की संभावना है।
परिसीमन का संबंध निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व के निर्धारण से है, जबकि महिला आरक्षण का उद्देश्य विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। इन दोनों विषयों का राजनीतिक और संवैधानिक महत्व देखते हुए संसद में व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
मॉनसून सत्र का सत्रावसान नहीं होना अहम संकेत
विशेष सत्र की संभावना को लेकर एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकार ने अभी तक संसद के मॉनसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं किया है। संसदीय प्रक्रिया के जानकार इस स्थिति को संभावित विशेष बैठक के संदर्भ में महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
हालांकि, केवल सत्रावसान नहीं होने से यह पुष्टि नहीं होती कि विशेष सत्र निश्चित रूप से बुलाया जाएगा। अंतिम फैसला सरकार की ओर से औपचारिक कार्यक्रम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
BRICS संसदीय फोरम के हिसाब से तय हो सकती हैं तारीखें
सूत्रों के मुताबिक, 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में प्रस्तावित 12वें BRICS संसदीय फोरम को ध्यान में रखकर विशेष सत्र की तारीखें तय की जा सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय संसदीय आयोजन के कार्यक्रमों के साथ तालमेल बैठाते हुए सत्र का कैलेंडर तैयार किए जाने की संभावना है।
यदि सरकार विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लेती है, तो सांसदों को लगभग एक सप्ताह पहले सूचना दिए जाने की बात भी सामने आई है।
विपक्षी दलों से सहमति बनाने की कोशिश
सरकार की ओर से कुछ छोटे विपक्षी दलों से बातचीत किए जाने की जानकारी सूत्रों ने दी है। ऐसे में विशेष सत्र बुलाए जाने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच परिसीमन तथा महिला आरक्षण के मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।
फिलहाल, विशेष सत्र की तारीख, विधेयकों का अंतिम स्वरूप और संसद में समर्थन का गणित स्पष्ट नहीं है। इन सभी पहलुओं पर सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्थिति साफ होगी।