राजनाथ सिंह के आरोपों पर कांग्रेस का पलटवार, पवन खेड़ा ने याद दिलाया 1977, कहा-चुनाव से ही बदलेगी सरकार
राजनाथ सिंह के बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा करने के आरोपों पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है और जंतर-मंतर से प्रतिबंध हटाया जाना चाहिए।;
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कांग्रेस और विपक्ष पर देश में बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा कर सत्ता हासिल करने की कोशिश के आरोपों पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि विपक्ष का मकसद चुनाव के जरिए सरकार बदलना है। उन्होंने सवाल उठाया कि लोकतंत्र में चुनाव के माध्यम से सत्ता परिवर्तन की मांग को गलत कैसे ठहराया जा सकता है? इस दौरान खेड़ा ने 1977 के सत्ता परिवर्तन का भी जिक्र किया।
‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अभियान पर कांग्रेस का रुख
पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ अभियान के जरिए चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उठा रही है। उनके मुताबिक, विपक्ष खुलकर कह रहा है कि वह चुनाव में मौजूदा सरकार को हराकर सत्ता से हटाना चाहता है। उन्होंने सवाल किया कि जब विपक्ष अपनी राजनीतिक मंशा स्पष्ट कर रहा है, तो इसे देश में अराजकता फैलाने की कोशिश के रूप में क्यों पेश किया जा रहा है?
खेड़ा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों को सत्ता से बाहर होने का डर सता रहा है। हालांकि, यह कांग्रेस नेता का राजनीतिक आरोप है।
1977 का उदाहरण देकर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद ने 1977 के आम चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि भारत में पहले भी चुनाव के जरिए सत्ता परिवर्तन हो चुका है। उस चुनाव में आपातकाल के बाद जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया था और जनता पार्टी की सरकार बनी थी।
खेड़ा के तर्क के मुताबिक, लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार की नीतियों का विरोध करना और चुनाव के जरिए उसे सत्ता से हटाने की कोशिश करना है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान सरकार बदलने की मांग उठना अपने आप में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ नहीं है।
राजनाथ सिंह ने क्यों की बांग्लादेश से तुलना?
दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल राजनीतिक अशांति फैलाने के लिए करने का आरोप लगाया था। लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा था कि दिल्ली में हाल की घटनाएं गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्ष भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति पैदा कर सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल देश निर्माण के बजाय राजनीतिक टकराव और अव्यवस्था फैलाने के लिए कर रहे हैं। ये आरोप सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं।
जंतर-मंतर को फिर प्रदर्शन स्थल बनाने की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर लगी पाबंदी हटाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को जंतर-मंतर को फिर से विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में बहाल करना चाहिए। खेड़ा ने तर्क दिया कि प्रदर्शन करने वाले लोग खान मार्केट या अन्य स्थानों पर जाकर धरना नहीं देंगे।
चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच यह मुद्दा केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच टकराव का नया कारण बन गया है। एक ओर भाजपा विपक्ष पर अशांति फैलाने के आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस अपनी मांगों को लोकतांत्रिक विरोध और चुनावी सत्ता परिवर्तन से जोड़ रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।