लगातार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक स्थगित

संसद के मानसून सत्र में लगातार हंगामे के बीच मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद फिर से बाधित हुई। मंगलवार सुबह 11 बजे सदन की बैठक शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद इसे दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। बाद में स्पीकर ने सदन को बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।;

Update: 2026-08-04 09:28 GMT

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में लगातार हंगामे के बीच मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद फिर से बाधित हुई। मंगलवार सुबह 11 बजे सदन की बैठक शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद इसे दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। बाद में स्पीकर ने सदन को बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

सदन शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। उनकी मांग थी कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित हों और जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शनकारियों पर की गई पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाब दें।

स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों से अपनी सीटों पर बैठने और प्रश्नकाल को शांतिपूर्वक चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह एक 'महत्वपूर्ण' समय है और नारेबाजी से जरूरी मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाएगी लेकिन विपक्ष का शोर कम नहीं हुआ। इसके बाद सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 2 बजे तक और फिर अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।

संसद का यह मानसून सत्र शुरू से ही हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। नीट पेपर लीक का मुद्दा और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की गई, इस पर गृह मंत्री को सदन में बयान देना चाहिए।

इससे पहले सोमवार को भी विपक्ष के शोर-शराबे के बीच ही एक अहम बिल पास हुआ। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा 'सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 ध्वनि मत से लोकसभा में पारित कर दिया गया।

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने विपक्ष की नारेबाजी के बीच ही सदन में बिल पेश किया। कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने बार-बार सदस्यों से शांति बनाए रखने और सदन चलने देने की अपील की लेकिन विरोध जारी रहा। इसके बावजूद बिल को मंजूरी मिल गई।


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