कर्नाटक एमएलसी चुनाव में डीके शिवकुमार की रणनीति रंग लाई, पांचों सीटों पर जीत; क्रास वोटिंग से भाजपा- जेडीएस को झटका
कर्नाटक MLC चुनाव में कांग्रेस ने सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज कर भाजपा और जेडी(एस) को बड़ा झटका दिया। क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं के बीच डीके शिवकुमार की रणनीति चर्चा में है।;
बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद (MLC) चुनाव में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने सभी पांच उम्मीदवारों को विजयी बना दिया। इस नतीजे ने राज्य की राजनीति में नया संदेश दिया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) को केवल दो सीटों से संतोष करना पड़ा और उसकी सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) यानी JDS अपना खाता भी नहीं खोल सकी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह जीत मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस संगठन के लिए बड़ी रणनीतिक सफलता मानी जा रही है। चुनाव परिणामों ने भाजपा-जेडी(एस) गठबंधन को झटका दिया है, जबकि कांग्रेस खेमे में उत्साह का माहौल है।
कांग्रेस को अपेक्षा से अधिक मिला समर्थन
कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि पार्टी को जितने वोट मिलने की उम्मीद थी, उससे कहीं अधिक समर्थन प्राप्त हुआ। पार्टी के पास अपने विधायकों और सहयोगियों को मिलाकर लगभग 138 वोटों का आधार था, लेकिन उसके उम्मीदवारों को कुल 151 वोट मिले।
इस अतिरिक्त समर्थन ने विपक्षी दलों में क्रॉस वोटिंग की चर्चाओं को तेज कर दिया है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि भाजपा और जेडी(एस) के कुछ विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया, जिससे चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया।
पांचों उम्मीदवारों ने दर्ज की जीत
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद, बीएस शिवन्ना, टिप्पणप्पा कामकानूर, पीवी मोहन और विनय कार्तिक ने जीत हासिल की। खास बात यह रही कि कांग्रेस के पांचवें उम्मीदवार विनय कार्तिक को सबसे अधिक 32 वोट मिले। उन्हें मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का करीबी माना जाता है।
कांग्रेस नेताओं ने इसे संगठनात्मक एकजुटता और बेहतर राजनीतिक प्रबंधन का परिणाम बताया है। पार्टी का कहना है कि यह जीत केवल उम्मीदवारों की नहीं बल्कि राज्य की जनता के विश्वास की जीत है।
भाजपा ने भी माना क्रॉस वोटिंग हुई
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने स्वीकार किया कि मतदान पैटर्न से यह संकेत मिलता है कि भाजपा के कुछ वोट दूसरी ओर गए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले की समीक्षा करेगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा के उम्मीदवार रघु कौटिल्य और लिंगराज पाटिल चुनाव जीतने में सफल रहे, लेकिन पार्टी को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। वहीं जेडी(एस) उम्मीदवार गोविंदराजू को केवल 14 वोट मिले और वह मुकाबले से बाहर हो गए।
चुनावी नतीजों के राजनीतिक मायने
इस चुनाव को जेडी(एस) नेता और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी की प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा जा रहा था। ऐसे में परिणामों को कांग्रेस के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त और विपक्षी गठबंधन के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद यह परिणाम कर्नाटक की राजनीति में नए समीकरणों का संकेत दे सकता है। कांग्रेस अब इन नतीजों को आगामी राजनीतिक रणनीति के लिए मजबूती के रूप में पेश कर रही है।