भगवान ने अहंकार तोड़ा: अखिलेश यादव का भाजपा पर तंज
बिहार के बांकीपुर और मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि भगवान को नचाने का अहंकार रखने वालों को भगवान ने ही नचा दिया।;
डबल इंजन की डबल हार: बांकीपुर और दतिया में भाजपा पराजित
- सोशल मीडिया पर वायरल: हनुमान गेटअप वाला वीडियो बना विपक्ष का हथियार
- जनता का आक्रोश: वोट चोरी से लेकर महंगाई तक भाजपा पर निशाना
- बदलाव की शुरुआत: अखिलेश बोले, भाजपा की सुरक्षित सीटें भी नहीं बचेंगी
नई दिल्ली। बिहार के बांकीपुर और मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि भगवान को नचाने का अहंकार रखने वालों को भगवान ने ही नचा दिया।
अखिलेश यादव ने अपनी बातों से उस वीडियो का जिक्र किया, जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन यूपी में थे और उनके रोड शो के दौरान हनुमान के गेटअप में एक शख्स नाचता दिखाई दिया था। बांकीपुर और दतिया चुनाव में भाजपा को मिली हार के बाद यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर विपक्षी खेमों की ओर से लगातार पोस्ट किए गए।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि भगवान को नचाने का अहंकार रखने वालों को भगवान ने ही नचा दिया। अपने को भगवान से ऊपर समझने वालों को भगवान ने चलती गाड़ी से नीचे उतार दिया है और साथ ही उनके घमंड का बुखार भी उतार दिया। ये युवाओं की एकता और उनके अभिभावकों के आक्रोश का संयुक्त परिणाम है क्योंकि ‘वोट चोरी’, ‘पेपर चोरी’, ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’, ’नौकरी चोरी’, ’आरक्षण चोरी’, ‘कमीशनखोरी’, ’पीडीए पर अत्याचार’, ’घोर भ्रष्टाचार’, ‘महंगाई की मार’, ’मिलावट के सरकारीकरण’, ‘माताओं-बेटियों तक का अपमान’ और ’देश के जेनजी पर हर तरह से प्रहार’, भाजपा ने इन सभी तरीकों से जनता के विश्वास और आस्था तक को ठगा है। अब तो भाजपावाले भी अपने ही ‘किसी’ का इस्तीफा मांगेंगे क्योंकि जो अपनी ही विधानसभा हार गए, उनके भरोसे नाव कैसे पार होगी।
अखिलेश यादव ने आगे लिखा कि ये हार उनकी है जिन्होंने उनको चुना था या कहें संगठन पर अपनी मर्जी की तरह थोपा था। अब तो कोई ये भी नहीं कह सकता है कि ‘भाजपा में इस्तीफे नहीं होते हैं।’ सबसे ज्यादा खुश तो उप्र में ‘वो’ हैं, जिनको ‘पीडीए’ समाज का होने की वजह से राष्ट्रीय स्तर का पद न देकर जानबूझकर राज्य स्तर का पद दिया गया था। आज तो वो भी मुस्कुराकर पूछ रहे हैं, ‘5 बड़ा या 7’। वैसे जनता ये भी कह रही है कि जब राष्ट्रीय अध्यक्ष विधानसभा नहीं जिता पाए तो राज्य-अध्यक्ष तो विधानसभा लड़वा भी नहीं पाएंगे। ये डबल इंजन की डबल हार है। भाजपा की हार मतलब बदलाव की शुरुआत है। भाजपा की सबसे सुरक्षित और परंपरागत सीटें भी अब उनकी हार नहीं बचा पाएंगी। अब भाजपा का संकट हार से बढ़कर इस बात का होगा कि उनका टिकट लेने वाला ‘ड्रोन और दूरबीन’ से भी ढूंढे नहीं मिलेगा। सभी विजयी उम्मीदवारों को जीत की बधाई।