ईपीएफ कर्मचारियों को बड़ी राहत, वेतन सीमा 15 हजार से बढ़कर 25 हजार करने के प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय की मंजूरी

वित्त मंत्रालय ने EPF वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद लाखों कर्मचारियों को EPF और EPS का लाभ मिलेगा।;

Update: 2026-08-03 11:20 GMT
नई दिल्ली। संगठित क्षेत्र में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के दायरे को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। वित्त मंत्रालय ने ईपीएफ की अनिवार्य वेतन सीमा को मौजूदा 15,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) के सामने रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद नई वेतन सीमा लागू होने की तारीख तय की जाएगी।

10 साल बाद बदलने जा रही है ईपीएफ वेतन सीमा

वर्तमान नियमों के अनुसार, जिन कर्मचारियों का मूल वेतन (Basic Pay) 15,000 रुपये प्रतिमाह तक है, उनके लिए EPF और EPS के तहत पंजीकरण अनिवार्य है। इससे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था वैकल्पिक रहती है और नियोक्ता पर उन्हें अनिवार्य रूप से शामिल करने की बाध्यता नहीं होती।

अब प्रस्तावित बदलाव के बाद 15,000 से 25,000 रुपये तक मूल वेतन पाने वाले कर्मचारी भी अनिवार्य रूप से EPF और EPS के दायरे में आ जाएंगे। इससे निजी क्षेत्र में कार्यरत लाखों नए कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद होगा अंतिम फैसला

सरकारी सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में वेतन सीमा को 30,000 रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव था, लेकिन विचार-विमर्श के बाद वित्त मंत्रालय ने 25,000 रुपये की सीमा को मंजूरी दी। अब इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। अंतिम निर्णय और लागू होने की तिथि मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद तय होगी।

कर्मचारियों को क्या होगा फायदा?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि और पेंशन योजना का लाभ मिलेगा। इससे कर्मचारियों की दीर्घकालिक बचत मजबूत होगी और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा भी बढ़ेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे कर्मचारियों के लिए बेहद अहम साबित होगा, जो अब तक वेतन सीमा अधिक होने के कारण ईपीएफ के अनिवार्य दायरे से बाहर थे।

कंपनियों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ

इस फैसले का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। निजी कंपनियों को भी अधिक कर्मचारियों के लिए ईपीएफ और ईपीएस में अनिवार्य अंशदान करना होगा, जिससे उनकी पेरोल लागत बढ़ सकती है।

वर्तमान व्यवस्था के तहत नियोक्ता कर्मचारी के मूल वेतन का 8.33 प्रतिशत कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में जमा करता है, जबकि केंद्र सरकार 1.16 प्रतिशत का योगदान देती है। ऐसे में नई वेतन सीमा लागू होने से सरकार और कंपनियों दोनों पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।

सरकार का खर्च भी बढ़ेगा

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के लिए 11,144 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वेतन सीमा बढ़ने के बाद इस मद में सरकार का व्यय और बढ़ने की संभावना है।

हालांकि, यह व्यवस्था केवल उन संस्थानों पर लागू होगी जहां 20 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। छोटे प्रतिष्ठान स्वैच्छिक रूप से ईपीएफ से जुड़ सकते हैं, लेकिन उन पर यह नियम अनिवार्य नहीं होगा। वहीं केंद्र सरकार के कर्मचारी अलग पेंशन व्यवस्था के तहत आते हैं, इसलिए यह बदलाव उन पर लागू नहीं होगा।

अप्रैल 2027 से लागू हो सकता है नया नियम

सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद भी नई व्यवस्था तुरंत लागू होने की संभावना कम है। कंपनियों को अपने पेरोल सिस्टम, सॉफ्टवेयर और अनुपालन प्रक्रियाओं में बदलाव के लिए समय दिया जाएगा।

सरकार का अनुमान है कि नई वेतन सीमा 1 अप्रैल 2027 से लागू की जा सकती है, हालांकि अंतिम तारीख कैबिनेट की मंजूरी और प्रशासनिक तैयारियों के बाद तय होगी। उल्लेखनीय है कि ईपीएफ की वेतन सीमा में पिछला संशोधन सितंबर 2014 में हुआ था, जब इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था।

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