जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में सौरभ दास और आशुतोष रांका क्राइम ब्रांच पहुंचे, पुलिस ने पूछताछ के लिए भेजा था समन

दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में CJP नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचे। पुलिस ने दोनों को पूछताछ के लिए समन जारी किया था।;

Update: 2026-11-05 07:04 GMT

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका गुरुवार को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के सामने पेश हुए। दोनों राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचे, जहां पुलिस उनसे मामले को लेकर पूछताछ करेगी। दिल्ली पुलिस ने उन्हें जांच में शामिल होने के लिए समन जारी कर दोपहर तक पेश होने को कहा था।

यह मामला 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध जता रहे थे। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई थी।

13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बिना अनुमति पहुंचे थे प्रदर्शनकारी

दिल्ली पुलिस के अनुसार, 13 अक्टूबर को सौरभ दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे समेत कुल 14 लोग जंतर-मंतर में प्रवेश कर गए थे। पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया था। इन लोगों का आरोप था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में गड़बड़ियां हो रही हैं।

जंतर-मंतर को फिलहाल विरोध प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है। इसी वजह से वहां बिना अनुमति प्रदर्शन करने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की थी। अक्टूबर में इन मामलों की जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई थी।

पुलिस ने इससे पहले भी सौरभ दास और आशुतोष रांका को समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन दोनों उस समय पेश नहीं हुए थे। उन्होंने जांच में शामिल होने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। अब दोनों क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंच गए हैं।

एक सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहे थे दोनों नेता

इस मामले में हिरासत के बाद अजिंक्य शिंदे को जमानत मिल गई थी, जबकि सौरभ दास और आशुतोष रांका करीब एक सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहे। 21 अक्टूबर को दोनों को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया था।

रिहाई के दौरान विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ऋतु राज ने दोनों से 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानत बांड भरवाए थे। साथ ही उन्हें शांति बनाए रखने और कानूनी अनुमति मिलने तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं करने का लिखित वचन देना पड़ा था।

SEM के सामने दिया था शांति बनाए रखने का आश्वासन

दोनों नेताओं ने अपने लिखित वचनपत्र में कहा था कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करेंगे। उन्होंने न्यायपालिका और SEM कोर्ट के प्रति भी भरोसा जताया था।

SEM कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 135(3) के तहत शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरवाने की प्रक्रिया को जरूरी कदम बताया था। ये शर्तें जंतर-मंतर में बिना अनुमति प्रवेश से जुड़े मामले की जांच पूरी होने तक लागू रहेंगी।

अब क्राइम ब्रांच के सामने दोनों नेताओं की पेशी को इस मामले की जांच में अगला अहम कदम माना जा रहा है। पुलिस पूछताछ के जरिए प्रदर्शन की परिस्थितियों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाएगी।

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