रूस के विदेश मंत्री के कथित एडिटेड वीडियो पर प्रशांत भूषण के खिलाफ FIR, जानें क्‍या है मामला

भूषण ने अपने एक्स अकाउंट पर लावरोव के एक वीडियो क्लिप के साथ टिप्पणी की थी कि रूसी विदेश मंत्री ने भारत को “जोरदार तमाचा” मारा है। पोस्ट में उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस को कैसी सलाह दे रहे थे।;

Update: 2026-11-05 04:45 GMT

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का कथित तौर पर भ्रामक और एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक, मंगलवार को नियमित साइबर पेट्रोलिंग के दौरान एक्स पर साझा की गई पोस्ट सामने आई। शुरुआती जांच के बाद स्पेशल सेल की नई दिल्ली रेंज में मामला दर्ज किया गया। पुलिस आरोपों की जांच कर रही है; एफआईआर में लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं।

एक्स पोस्ट में क्या था?

भूषण ने अपने एक्स अकाउंट पर लावरोव के एक वीडियो क्लिप के साथ टिप्पणी की थी कि रूसी विदेश मंत्री ने भारत को “जोरदार तमाचा” मारा है। पोस्ट में उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस को कैसी सलाह दे रहे थे। शेयर किए गए क्लिप में लावरोव को भारत को रूस का केवल व्यापारिक साझेदार बताते और उसकी विदेश नीति पर टिप्पणी करते दिखाया गया था। वीडियो में उन्हें भारत के आंतरिक मामलों और रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर आलोचना करते हुए भी पेश किया गया। पुलिस का कहना है कि शुरुआती पड़ताल में क्लिप फर्जी या बदला हुआ पाया गया। विदेश मंत्रालय ने भी वीडियो को फर्जी बताते हुए उसका फैक्ट-चेक किया था।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(4), 353(1)(सी), 356 और 340(2), साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं कथित कूटरचना, झूठी सूचना के प्रसार, मानहानि, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के इस्तेमाल और पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी के आरोपों से संबंधित हैं। एफआईआर दर्ज होने का अर्थ आरोप साबित होना नहीं है। जांच के दौरान पुलिस पोस्ट, वीडियो की उत्पत्ति और उसे साझा किए जाने के संदर्भ की पड़ताल करेगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में वीडियो को लेकर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच शुरू की है।

किरेन रिजिजू ने क्या कहा?

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट कर भूषण की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि भूषण पहले भी जजों और मंत्रियों के लंदन में बैडमिंटन खेलने जाने को लेकर फर्जी खबर फैला चुके हैं और उसके लिए माफी नहीं मांगी। रिजिजू ने मौजूदा मामले को भारत की छवि और संवैधानिक संस्थाओं को नुकसान पहुंचाने की साजिश बताया। रिजिजू की टिप्पणी राजनीतिक प्रतिक्रिया है; यह पुलिस जांच के निष्कर्ष का विकल्प नहीं है। मामले में भूषण की ओर से इस एफआईआर पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध कराई गई जानकारी में शामिल नहीं है।

वीडियो की प्रामाणिकता जांच के केंद्र में

इस प्रकरण का मुख्य सवाल यह है कि लावरोव का वीडियो किस स्रोत से आया, क्या उसमें संपादन या कृत्रिम बदलाव किया गया था और सोशल मीडिया पर साझा किए जाने से पहले उसकी पुष्टि की गई थी या नहीं। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में वीडियो को फर्जी पाया गया है। विदेश मंत्रालय का फैक्ट-चेक भी उसे फर्जी बताता है। हालांकि, जांच के अंतिम नतीजे और वीडियो तैयार करने या प्रसारित करने में शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि आगे की पड़ताल के बाद ही होगी।

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