भारतीय नौसेना बेड़े में शामिल होने जा रहा INS अंजदीप, स्वदेशी स्टील से बना है योद्धा

भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ने जा रही है। स्वदेशी स्टील से बना पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (ASW SWC) INS अंजदीप जल्द ही नौसेना में शामिल होगा। जानिए इस फौलादी योद्धा की खासियतें और मारक क्षमता।

Update: 2026-02-27 05:54 GMT

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत में जल्द ही एक और बड़ा इजाफा होने जा रहा है। दुश्मनों की पनडुब्बियों को समुद्र की गहराइयों में ही नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखने वाला युद्धपोत 'आईएनएस अंजदीप' नौसेना के बेड़े में शामिल होने के लिए तैयार है। सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से 'मेक इन इंडिया' पहल का हिस्सा है और इसका निर्माण पूर्ण रूप से स्वदेशी स्टील से किया गया है।

देश की सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात उत्पादक और महारत्न कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा निर्मित आईएनएस अंजदीप के लिए जरूरत की पूरी मात्रा की स्पेशल ग्रेड स्टील की आपूर्ति की है। आईएनएस अंजदीप भारतीय नौसेना में शामिल होने जा रहा तीसरा एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) कार्वेट है।

इससे पहले पिछले साल आईएनएस अरनाला और आईएनएस एंड्रोथ भी शामिल किए जा चुके हैं।नौसेना के पुराने होते 'अभय-श्रेणी' के जहाजों को बदलने के लिए इन ASW-SWC कार्वेट का निर्माण स्वदेशी रूप से किया जा रहा है। इस रणनीतिक प्रयास में योगदान देते हुए, सेल (SAIL) ने गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) द्वारा बनाए जा रहे आठ ASW-SWC कार्वेट के लिए लगभग 3,500 टन विशेष-ग्रेड स्टील की पूरी मात्रा की आपूर्ति की है।

इस स्टील की आपूर्ति सेल के बोकारो, भिलाई और राउरकेला स्थित एकीकृत इस्पात संयंत्रों से की गई है, जो देश की डोमेस्टिक सप्लाई चेन की मजबूती को रेखांकित करता है।यह उपलब्धि रक्षा विनिर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने के प्रति सेल की प्रतिबद्धता को उजागर करती है। पिछले कुछ वर्षों में, सेल ने रक्षा स्वदेशीकरण में देश की विशेष-ग्रेड स्टील की जरूरतों को लगातार पूरा किया है और आईएनएस विक्रांत, आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस नीलगिरी, आईएनएस सूरत जैसी अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए स्टील की आपूर्ति की है।

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