भारत में पाकिस्तानी-बांग्लादेशी गैर-मुस्लिमों के लिए बदले नियम, अब लेना होगा वीजा; जानें 5 बड़े बदलाव

भारत सरकार ने इमिग्रेशन नियमों में बदलाव किया है। पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और अफगानिस्तानी गैर-मुस्लिमों समेत कई श्रेणियों के लिए नए नियम लागू, जानिए 5 बड़े बदलाव।;

Update: 2026-11-06 08:46 GMT

नई दिल्ली। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों के लोगों के लिए केंद्र सरकार ने इमिग्रेशन नियमों में बदलाव किया है। नए आदेश के तहत भारत में रहने वाले इन समुदायों के लोगों को अब वीजा संबंधी नियमों का पालन करना होगा। इन छह समुदायों में हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शामिल हैं।

पहले इन समुदायों के ऐसे लोगों को पासपोर्ट और वीजा की अनिवार्यता से छूट मिली हुई थी, जो 31 दिसंबर 2024 या उससे पहले भारत आ चुके थे। इनमें बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के भारत पहुंचे लोग और जिनके दस्तावेजों की अवधि समाप्त हो चुकी है, वे भी शामिल थे।

गृह मंत्रालय ने गुरुवार को इमिग्रेशन नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। नए आदेश में पाकिस्तानी नागरिकों, भारतीय मूल के विदेशियों और भारत, नेपाल तथा भूटान के बीच यात्रा करने वाले नागरिकों के लिए भी कई बदलाव किए गए हैं।

क्या हैं नए इमिग्रेशन नियम? जानिए 5 बड़े बदलाव

1. पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट रिन्यू कराने में राहत

नए नियमों के तहत 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले भारत आए कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट रिन्यू कराने की अनिवार्यता से छूट दी गई है। यह राहत उन लोगों के लिए है, जो स्थायी रूप से भारत में रह रहे हैं और पाकिस्तानी राष्ट्रीय पहचान पत्र (CNIC) नहीं होने के कारण पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं करा पा रहे हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें लिखित आश्वासन देना होगा कि वे भविष्य में पाकिस्तान वापस नहीं जाएंगे।

2. मलेशिया और सिंगापुर में बसे भारतीय मूल के लोगों को राहत

सरकार ने मलेशिया और सिंगापुर की नागरिकता लेने वाले कुछ भारतीय मूल के लोगों को भी राहत दी है। 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले इन देशों के पासपोर्ट पर भारत आए ऐसे लोग, जिनका पासपोर्ट एक्सपायर हो चुका है और वे संबंधित देशों के नियमों के कारण इसे रिन्यू नहीं करा सकते, नए प्रावधानों का लाभ उठा सकेंगे। हालांकि, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान और चीन के नागरिक इस छूट के पात्र नहीं होंगे।

3. भारत, नेपाल और भूटान के बीच यात्रा के नियम स्पष्ट

नए आदेश में तीनों पड़ोसी देशों के नागरिकों की आवाजाही को लेकर नियम स्पष्ट किए गए हैं। अब जमीन और हवाई मार्ग से सीधे यात्रा करने वाले नागरिक निर्धारित पहचान पत्र दिखाकर सीमा पार कर सकेंगे। हालांकि, तीसरे देश के रास्ते यात्रा करने या चीन, हांगकांग, मकाऊ और पाकिस्तान से आने वाले कुछ यात्रियों के लिए पासपोर्ट और वीजा की अनिवार्यता बनी रहेगी।

4. श्रीलंकाई तमिलों और तिब्बतियों को पुरानी छूट जारी

सरकार ने भारत में शरण लेने वाले पंजीकृत श्रीलंकाई तमिलों और निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले तिब्बती नागरिकों को पासपोर्ट-वीजा नियमों से मिली पुरानी छूट बरकरार रखी है। इसके तहत तय तारीखों के बीच भारत आए और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने वाले लोग लाभ उठा सकेंगे। कुछ तिब्बती नागरिकों के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र लेना भी जरूरी होगा।

5. सेना के जवानों और विदेशी सैन्य जहाजों के कर्मचारियों को छूट

नए इमिग्रेशन आदेश में सैन्य गतिविधियों से जुड़े कुछ विशेष मामलों के लिए भी छूट का प्रावधान रखा गया है। इसमें सेना के जवानों और विदेशी सैन्य जहाजों के कर्मचारियों से संबंधित नियम शामिल हैं।

CAA और नए इमिग्रेशन नियमों में क्या है अंतर?

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) 2019 और इमिग्रेशन आदेश 2026 दोनों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों से जुड़े हैं। हालांकि, दोनों का उद्देश्य अलग-अलग है। CAA पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का अवसर देता है, जबकि इमिग्रेशन नियमों का संबंध भारत में प्रवेश, रहने और यात्रा दस्तावेजों की अनिवार्यता से है।

इस तरह नए संशोधनों का असर भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों और कुछ विशेष समुदायों पर पड़ेगा। सरकार के इस फैसले से इमिग्रेशन व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।

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