भारतीय राजदूत ने अमेरिकी सांसद को दिया जवाब, FCRA बिल पर गिनाए 5 ‘भ्रम’ और बताई सच्चाई
FCRA Amendment Bill को लेकर अमेरिकी सांसद के आरोपों के बीच भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने पांच प्रमुख भ्रमों पर सफाई दी और भारत का पक्ष रखा।;
भ्रम 1: विदेशी फंडिंग रोकने के लिए बनाया जा रहा कानून
क्वात्रा के मुताबिक, विदेशी फंडिंग को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से नियंत्रित करना भारत का संप्रभु अधिकार है। उन्होंने बताया कि भारत में FCRA कानून 1976 से लागू है और इसमें 2010, 2016, 2018 तथा 2020 में भी बदलाव किए जा चुके हैं। उनके अनुसार प्रस्तावित 2026 संशोधन इसी प्रक्रिया की अगली कड़ी है और नियमों का पालन करने वाले NGO को विदेशी फंडिंग से रोकने का उद्देश्य नहीं है।
भ्रम 2: NGO और चैरिटी का काम बंद हो जाएगा
भारतीय राजदूत ने विदेशी फंडिंग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इसमें कमी नहीं, बल्कि बढ़ोतरी हुई है। उनके अनुसार 2010-11 में भारत में करीब 1.2 बिलियन डॉलर विदेशी फंड आया था, जबकि 2024-25 में यह बढ़कर 2.67 बिलियन डॉलर हो गया। उन्होंने बताया कि देश में 30 लाख से अधिक NGO होने के बावजूद करीब 14,450 संगठनों के पास FCRA रजिस्ट्रेशन है।
भ्रम 3: धार्मिक संस्थानों की संपत्ति जब्त होगी
क्वात्रा ने चर्च, अस्पताल और स्कूलों की संपत्ति जब्त किए जाने के दावे को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद संपत्ति के प्रबंधन से जुड़ा प्रावधान 2010 से मौजूद है। प्रस्तावित कानून में संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक नामित प्राधिकरण का प्रावधान किया जा रहा है। रजिस्ट्रेशन बहाल होने पर संबंधित संगठन को संपत्ति और फंड वापस मिलने की व्यवस्था बताई गई है।
भ्रम 4: किसी धर्म या समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है
भारतीय राजदूत ने कहा कि FCRA किसी विशेष धर्म, समुदाय या विचारधारा के खिलाफ नहीं है। नियम सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होते हैं। इसलिए इसे किसी खास धार्मिक समूह को निशाना बनाने वाला कानून बताना सही नहीं है।
भ्रम 5: भारत अकेला देश है जो ऐसा कानून बना रहा है
क्वात्रा ने अमेरिका समेत कई देशों के उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशी फंडिंग और विदेशी प्रभाव को नियंत्रित करने वाले कानून अन्य देशों में भी मौजूद हैं। उन्होंने अमेरिका के FARA और FATCA, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन के संबंधित कानूनों का उल्लेख किया।
विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी सांसद को दिया जवाब
अमेरिकी सांसद राइली मूर ने आरोप लगाया था कि प्रस्तावित कानून से धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों पर असर पड़ सकता है और इससे भारत-अमेरिका संबंध प्रभावित हो सकते हैं। भारत के विदेश मंत्रालय ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि FCRA से संबंधित कानून बनाना भारत की संसद का आंतरिक विधायी विषय है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि कई देशों में विदेशी फंड को नियंत्रित करने के लिए कानून मौजूद हैं।