प्रकृति ही सबसे बड़ा भगवान, इसका संरक्षण ही उपासना: डॉ. अनिल जोशी
पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने मधुबनी के ककरौल में प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति सबसे बड़ा भगवान है और उसका संरक्षण ही उपासना है।;
मधुबनी: पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जागरूकता का संदेश लेकर राष्ट्रीय साइकिल यात्रा पर निकले पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी शुक्रवार रात नेपाल के जनकपुर से मधुबनी के जयनगर पहुंचे। रात्रि विश्राम के बाद शनिवार सुबह उनका 14 सदस्यीय दल साइकिल से आगे रवाना हुआ। करीब दो घंटे की यात्रा के बाद दल रहिका प्रखंड के ककरौल पहुंचा, जहां डॉ. जोशी ने ग्रामीणों के साथ जनसंवाद कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।
प्रकृति की अनदेखी पर जताई चिंता
जनसंवाद के दौरान डॉ. जोशी ने कहा कि प्रकृति हमारा साथ छोड़ रही है और यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि हम अपने घरों में भगवान की मूर्तियां रखते हैं और गांव-शहर में मंदिर बनाते हैं, लेकिन जो प्रकृति हमें पानी, हवा और जीवन देती है, उसके प्रति हमारी जिम्मेदारी को अक्सर भूल जाते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति और भगवान को अलग-अलग देखने की जरूरत नहीं है। मानव जीवन दोनों से जुड़ा हुआ है। उनके मुताबिक जंगल, जल और जमीन जीवन के आधार हैं और इनका संरक्षण करना ही वास्तविक उपासना है।
सभी धर्मों और समाज के लिए प्रकृति जरूरी
डॉ. जोशी ने कहा कि इंसान किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से हो, उसे जीवन के लिए पानी और प्राणवायु की जरूरत होती है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण किसी एक वर्ग या समुदाय का विषय नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने कोविड संक्रमण काल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई, तब समाज को प्राणवायु की वास्तविक कीमत समझ में आई। ऐसे अनुभवों से सबक लेते हुए प्रकृति के संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाना जरूरी है।
2008 से जारी है पर्यावरण जागरूकता यात्रा
डॉ. जोशी ने बताया कि वर्ष 2008 से अब तक यह उनकी पांचवीं ऐसी यात्रा है। जनसंवाद के बाद उनका दल दरभंगा के लिए रवाना हुआ। इसके बाद यात्रा समस्तीपुर, बेगूसराय, मुंगेर, जमुई और भागलपुर होते हुए झारखंड के देवघर पहुंचेगी।
यात्रा में उनके शिष्य अनिल डंगवाल, देवेश कोठारी, मनमोहन जोशी, मेघा, रंजना और ज्योति समेत कुल 14 सदस्य साइकिल के साथ शामिल हैं।
पंचायती राज विभाग कर रहा समन्वय
पंचायती राज पदाधिकारी, रहिका अमितेश कुमार ने बताया कि यात्रा के समन्वय और जनसंवाद के लिए राज्य स्तर से विभागीय परियोजना निदेशक नवीन कुमार सिंह की ओर से पत्र जारी किया गया है। इसी के तहत यात्रा के दौरान पंचायत भवनों में ग्रामीणों के साथ संवाद और दल के विश्राम की व्यवस्था की जा रही है।