राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर कांग्रेस का सवाल, जयराम रमेश बोले- बड़े जिम्मेदारों की जवाबदेही कब तय होगी?
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पीएम मोदी और जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। SIT की जांच में 105 घटनाओं और 79.85 लाख रुपये की बरामदगी का उल्लेख है।;
नई दिल्ली। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जांच की दिशा केवल चोरी के आरोपियों तक सीमित क्यों है और उन लोगों की जवाबदेही कब तय होगी, जिनकी निगरानी में चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था चल रही थी।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा को इस मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है। SIT की चार्जशीट में दोनों के नाम गवाहों की सूची में शामिल हैं। पुलिस ने पहले दोनों से पूछताछ भी की थी।
105 घटनाओं और 79.85 लाख की बरामदगी पर सवाल
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर पूछा कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की इतनी घटनाएं सामने आने के बावजूद जांच का दायरा कितना व्यापक है। उनके मुताबिक, CCTV फुटेज में 105 कथित चोरी या नकदी हटाने की घटनाएं सामने आई हैं।
SIT की जांच के अनुसार आठ लोगों को मामले में गिरफ्तार किया गया और सात आरोपियों से करीब 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए। सितंबर में दाखिल चार्जशीट में 105 घटनाओं का उल्लेख है। जांच में CCTV फुटेज, डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और फोरेंसिक ऑडिट समेत कई दस्तावेजों को शामिल किया गया है।
चंपत राय को वीडियो मिलने के बाद क्या हुआ?
कांग्रेस का एक प्रमुख सवाल उस घटनाक्रम को लेकर है, जिसमें चंपत राय तक चोरी से जुड़ा वीडियो पहुंचने की बात सामने आई थी। SIT की चार्जशीट के मुताबिक, 4 जून को उन्हें एक वीडियो और संदेश के जरिए गणना कक्ष के बाथरूम में रखी नकदी की जानकारी दी गई थी। बाद में अयोध्या पहुंचने पर उन्हें अन्य फुटेज भी दिखाए गए, जिनमें गणना कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर चढ़ावे की रकम हटाते हुए दिखाई देने की बात कही गई है।
इसके बाद निगरानी और जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ी। 25 जून को FIR दर्ज की गई और आठ लोगों को नामजद किया गया। सभी आठ आरोपी फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं।
कांग्रेस बोली- बड़े स्तर की जवाबदेही भी हो
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि क्या जांच का मकसद केवल उन कर्मचारियों को पकड़ना है, जिन पर सीधे तौर पर रकम हटाने का आरोप है, या फिर प्रशासनिक और पर्यवेक्षी स्तर की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले पर जवाब देने की मांग की।
वहीं, SIT की जांच में प्रशासनिक और निगरानी संबंधी कमियों का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, दान की गिनती के दौरान निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन नहीं हुआ और निगरानी में कई स्तरों पर खामियां सामने आईं।
अब इस मामले में राजनीतिक आरोपों के साथ जांच की कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। SIT की विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल हो चुकी है और अदालत में आगे की कार्रवाई के दौरान यह तय होगा कि आरोपों के आधार पर किसकी कानूनी जिम्मेदारी बनती है।