तीन-भाषा नीति पर दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, मध्य सत्र में लागू करने पर जताई आपत्ति
दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को मौजूदा सत्र में लागू करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने शिक्षकों, किताबों और तैयारी की कमी का हवाला देते हुए नीति को स्थगित करने की मांग की।;
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Digvijaya Singh ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर सीबीएसई की तीन-भाषा नीति को मौजूदा शैक्षणिक सत्र में लागू करने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सरकार से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए इस नीति के क्रियान्वयन को फिलहाल स्थगित करने का आग्रह किया है।
दिग्विजय सिंह, जो संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि पर्याप्त तैयारी, प्रशिक्षित शिक्षकों और पाठ्यपुस्तकों के अभाव में सत्र के बीच नई व्यवस्था लागू करना छात्रों और स्कूलों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
अभिभावकों की शिकायतों को बताया जायज
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सिंह ने कहा कि उन्हें कक्षा 9 के कई छात्रों के अभिभावकों से शिकायतें और ज्ञापन प्राप्त हुए हैं। इन अभिभावकों ने मध्य सत्र में तीन-भाषा नीति को अनिवार्य रूप से लागू किए जाने का विरोध किया है।
उन्होंने कहा कि शिकायतों का अध्ययन करने के बाद उन्हें लगा कि अभिभावकों की चिंताएं वास्तविक हैं और उन पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए। यदि पर्याप्त शिक्षक, अध्ययन सामग्री और तैयारी का समय उपलब्ध नहीं होगा तो नई नीति के कारण शैक्षणिक व्यवस्था में अव्यवस्था फैल सकती है।
सीबीएसई के निर्णय पर उठाए सवाल
दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में कहा कि दिसंबर 2025 में हुई सीबीएसई की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि जब तक नई भाषा संबंधी पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक पुरानी व्यवस्था के अनुसार पढ़ाई जारी रहेगी।
इसके बावजूद सीबीएसई ने 15 मई 2026 को जारी आदेश में 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीसरी भाषा का अध्ययन अनिवार्य कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तक नई किताबें उपलब्ध नहीं हैं, तब तक स्कूलों को कक्षा 6 की पुस्तकों के उपयोग की सलाह देना व्यावहारिक समाधान नहीं माना जा सकता।
दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर चिंता
कांग्रेस नेता ने कहा कि नई व्यवस्था का सबसे अधिक प्रभाव दक्षिण भारत और उत्तर-पूर्वी राज्यों के छात्रों पर पड़ सकता है, जहां हिंदी व्यापक रूप से नहीं बोली जाती। इसके अलावा कई स्थानीय और जनजातीय भाषाएं सीबीएसई की मान्यता प्राप्त सूची में शामिल नहीं हैं, जिससे विद्यार्थियों को भाषा चयन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई स्कूलों में संस्कृत तीसरी भाषा के रूप में लोकप्रिय है, लेकिन योग्य शिक्षकों और उपयुक्त पाठ्यपुस्तकों की कमी इस उद्देश्य को प्रभावित कर सकती है।
अदालत के फैसले तक रोक लगाने की मांग
दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि मौजूदा कक्षा 9 के छात्रों के लिए इस नीति को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए। उन्होंने बताया कि इस मामले में न्यायालय में सुनवाई जारी है और फैसला 15 जुलाई 2026 को आने की संभावना है, जबकि स्कूलों में तीसरी भाषा की पढ़ाई 1 जुलाई से शुरू होनी है।
उन्होंने कहा कि अदालत के निर्णय से पहले नीति लागू करना छात्रों और स्कूलों के लिए अतिरिक्त भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है। सिंह ने सरकार से छात्रों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील और व्यावहारिक निर्णय लेने की अपील की।