राम मंदिर चढ़ावा मामले पर केजरीवाल का केंद्र पर हमला, प्रधानमंत्री से पूछे कई सवाल, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठाए प्रश्न
राम मंदिर चढ़ावा मामले पर अरविंद केजरीवाल का केंद्र सरकार पर बड़ा हमला। ट्रस्ट, कथित अनियमितताओं और जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए, निष्पक्ष जांच की मांग।;
नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। गुरुवार को दिल्ली में प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के साथ आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि उनके पास इस बात का कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है कि कथित तौर पर चोरी का पैसा प्रधानमंत्री तक पहुंचा, लेकिन उनका आरोप है कि पूरे मामले में दोषियों को बचाने और मामले को दबाने की कोशिश की गई।
केजरीवाल ने कहा कि यदि इतने लंबे समय तक कथित अनियमितताएं होती रहीं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। उन्होंने पूरे मामले में निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग भी उठाई।
ट्रस्ट के गठन और कथित अनियमितताओं को लेकर लगाए आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार के स्तर पर हुआ था और ट्रस्ट के सदस्यों के चयन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभी तक जिन लोगों की गिरफ्तारी हुई है, वे निचले स्तर के कर्मचारी हैं, जबकि पूरे मामले में बड़े स्तर पर जवाबदेही तय होना आवश्यक है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री तक धन पहुंचने संबंधी कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य उनके पास नहीं है और इस विषय पर वे कोई निश्चित दावा नहीं कर रहे हैं।
जमीन सौदे और निर्माण कार्य को लेकर भी उठाए सवाल
केजरीवाल ने वर्ष 2021 में सामने आए राम मंदिर से जुड़े जमीन खरीद विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जमीनों की खरीद-फरोख्त कम समय में कई गुना अधिक कीमत पर हुई थी, जिसकी उस समय भी व्यापक चर्चा हुई थी।
इसके अलावा उन्होंने मंदिर निर्माण कार्य में कथित कमीशनखोरी के आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि यदि निर्माण प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं तो उनकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कथित तौर पर सीसीटीवी फुटेज हटाने और अन्य मामलों की समय रहते जानकारी संबंधित एजेंसियों को क्यों नहीं मिली।
जांच प्रक्रिया पर भी जताए सवाल, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
आम आदमी पार्टी प्रमुख ने आरोप लगाया कि मामले में विशेष जांच दल (SIT) के गठन और बाद में दर्ज एफआईआर की प्रक्रिया पर भी सवाल उठते हैं। उनका कहना था कि यदि कथित अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी तो तत्काल कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
केजरीवाल ने दावा किया कि उन्हें सूत्रों के माध्यम से जानकारी मिली है कि इस मामले को लेकर संबंधित एजेंसियों की रिपोर्टें भी तैयार की गई थीं। हालांकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक दस्तावेज या आधिकारिक प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो निष्पक्ष जांच के जरिए सभी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। फिलहाल इस मामले में केंद्र सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से केजरीवाल के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।