नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए जारी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA), 2010 के तहत इस वर्ष 72 स्वयंसेवी संगठनों को पंजीकरण की मंजूरी दी है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इन संगठनों को अलग-अलग सामाजिक, शैक्षिक, धार्मिक और आर्थिक श्रेणियों के तहत विदेशी फंडिंग प्राप्त करने की अनुमति दी गई है। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े कुछ संगठनों सहित कई प्रमुख एनजीओ शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न सामाजिक कार्यों के लिए पंजीकरण दिया गया है।
सेवा भारती को सामाजिक और आपदा राहत कार्यों की अनुमति
सूची में शामिल सेवा भारती को आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक उद्देश्यों के तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए पंजीकृत किया गया है। यह संगठन देशभर में ब्लड बैंक संचालन, आपदा राहत कार्य और सामाजिक सेवा गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाता है। सेवा भारती लंबे समय से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और आपदा सहायता से जुड़े कार्यक्रमों का संचालन करती रही है।
प्रोजेक्ट मुंबई को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत मंजूरी
इसी सूची में प्रोजेक्ट मुंबई को भी FCRA पंजीकरण प्राप्त हुआ है। यह संगठन सामाजिक बदलाव के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर काम करता है। इसके कार्यक्षेत्र में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना और जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराना शामिल है। संगठन शहर आधारित सामाजिक चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित है और विभिन्न कॉरपोरेट तथा नागरिक निकायों के साथ मिलकर काम करता है।
हरे कृष्ण मूवमेंट इंडिया को कई श्रेणियों में अनुमति
हरे कृष्ण मूवमेंट इंडिया को भी विदेशी चंदे के लिए पंजीकरण मिला है। यह संगठन धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियों के तहत कार्य करता है। संस्था वंचित बच्चों के सशक्तिकरण, शिक्षा और भोजन सहायता जैसे कार्यक्रमों पर काम करती है। यह संगठन देश और विदेश दोनों स्तरों पर अपने सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है।
सरकार ने नियमों में किया बदलाव, बढ़ाई जवाबदेही
केंद्र सरकार ने हाल ही में FCRA नियमों में बदलाव करते हुए विदेशी फंड के उपयोग को लेकर जवाबदेही और निगरानी को और सख्त किया है। नए प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन का उपयोग केवल निर्धारित सामाजिक और विकासात्मक उद्देश्यों के लिए ही किया जाए। गृह मंत्रालय के अनुसार, अब एनजीओ को अपने वित्तीय लेनदेन, उपयोग और गतिविधियों की अधिक पारदर्शिता के साथ रिपोर्टिंग करनी होगी।
एनजीओ सेक्टर में बढ़ी निगरानी और पारदर्शिता पर जोर
विशेषज्ञों के अनुसार, FCRA नियमों में बदलाव से एनजीओ सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और विदेशी फंड के दुरुपयोग पर रोक लगेगी। सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी चंदा केवल वैध और सामाजिक कल्याणकारी कार्यों में ही इस्तेमाल हो। हालांकि, कई सामाजिक संगठनों का मानना है कि नियमों के कड़े होने से छोटी संस्थाओं के संचालन में चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।