डे-केयर में बच्चों से बेरहमी: टॉयलेट जेट से मुंह पर पानी डाला, वॉशिंग मशीन में बैठाया

मामला तब सामने आया जब डे-केयर सेंटर के भीतर के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इन वीडियो में कथित तौर पर छोटे बच्चों को रोते, डरते और असहज स्थिति में देखा जा सकता है। एक वीडियो में एक बच्चा शौचालय के अंदर बंद नजर आता है, जबकि वह जोर-जोर से रो रहा है।;

Update: 2026-07-02 09:21 GMT

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक प्रमुख आईटी कंपनी कैपजेमिनी के एचएएल कैंपस में संचालित डे-केयर सेंटर में छोटे बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार के आरोप लगे हैं। इस घटना ने शहर में हड़कंप मचा दिया है और कार्यस्थल पर चल रहे चाइल्ड केयर सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि यहां काम करने वाली कुछ केयरगिवर्स (आया) ने दो साल तक के मासूम बच्चों के साथ मारपीट और मानसिक उत्पीड़न जैसी हरकतें कीं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो से मचा बवाल

मामला तब सामने आया जब डे-केयर सेंटर के भीतर के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इन वीडियो में कथित तौर पर छोटे बच्चों को रोते, डरते और असहज स्थिति में देखा जा सकता है। एक वीडियो में एक बच्चा शौचालय के अंदर बंद नजर आता है, जबकि वह जोर-जोर से रो रहा है। वहीं, एक अन्य वीडियो में एक महिला बच्चे का वीडियो बनाते हुए दिखाई देती है, जबकि बच्चा लगातार रो रहा है।

टॉयलेट और वॉशिंग मशीन से जुड़े गंभीर आरोप

वीडियो में सामने आए दृश्यों में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एक बच्चे को कथित तौर पर टॉयलेट सीट पर बैठाकर उसके मुंह पर जेट स्प्रे से पानी डाला जा रहा है। एक अन्य वीडियो में बच्चे को फ्रंट लोड वॉशिंग मशीन के ड्रम में बैठाकर डराए जाने के दृश्य भी सामने आए हैं। इसके अलावा यह भी आरोप है कि बच्चों के रोने या शरारत करने पर उन्हें डराने और दंडित करने के लिए शौचालय में बंद किया जाता था। इन घटनाओं को देखकर अभिभावकों में गहरा आक्रोश फैल गया है।

डे-केयर सेंटर में पांच कर्मचारियों पर FIR

वीडियो वायरल होने के बाद मामले की जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन तक पहुंची, जिसके बाद एचएएल थाना पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच के आधार पर डे-केयर सेंटर में कार्यरत पांच केयरगिवर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सभी वायरल वीडियो की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि ये घटनाएं कब और कितनी बार हुईं।

पुलिस का सख्त कार्रवाई के संकेत

पुलिस ने कहा है कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जा रहा है और सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि डे-केयर सेंटर की निगरानी व्यवस्था कैसी थी और क्या कंपनी स्तर पर सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

कामकाजी माता-पिता में बढ़ी चिंता

इस घटना के सामने आने के बाद आईटी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों और अन्य अभिभावकों में भारी चिंता फैल गई है। कई माता-पिता ने सवाल उठाए हैं कि जब वे अपने बच्चों को सुरक्षित समझकर डे-केयर में छोड़ते हैं, तो ऐसी घटनाएं कैसे हो सकती हैं। यह मामला कार्यस्थल पर संचालित डे-केयर सेंटरों की निगरानी और मानकों को लेकर भी गंभीर बहस को जन्म दे रहा है।

बाल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल संस्थागत लापरवाही को उजागर करती हैं, बल्कि बाल सुरक्षा तंत्र की खामियों की ओर भी इशारा करती हैं। डे-केयर सेंटरों में प्रशिक्षित स्टाफ, नियमित ऑडिट और सीसीटीवी निगरानी को अनिवार्य किए जाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है।

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