किसानों ने एनटीपीसी पर लगाया भूमि पर कब्जे का आरोप

अराजकता और अन्याय कंश के साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण अंश था वैसे ही प्रतीत होता है कि मेरा नियम मेरा कानून और मैं ही सरकार हूँ कि मानसिकता में कंश का सर्वनाश हुआ

Update: 2018-05-02 11:27 GMT

रायगढ़। अराजकता और अन्याय कंश के साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण अंश था वैसे ही प्रतीत होता है कि मेरा नियम मेरा कानून और मैं ही सरकार हूँ कि मानसिकता में कंश का सर्वनाश हुआ, जनता के विद्रोह, इंकलाब और आंदोलन से ऐसे ही परिस्थिति में भ्रष्ट तथा अन्यायकारी प्रशासन की तख्ती तो अवश्य ही टूटेगी।

परिस्थिति वश हड़ताल चौक, छपोरा में भ्रष्ट और अन्याय कारी प्रशासन के खिलाफ अपनी 1 सूत्रीय मांगों को लेकर भूविस्थापित एवं प्रभावितों ने जो आंदोलन चालू किया उसका आज 42वां दिन है क्योंकि यह इतिहास है की भूविस्थापितों ने इस जिले में प्रशासनिक चारपाई को हिलाने के लिए यह आंदोलन करने की ठोस रणनीति बनाई जिससे यह निरंतर जनसमर्थन मिलने और आम जनता के बीच न्याय पाने के लिए संस्मृत हो गया है।

 जिस प्रकार से इस एनटीपीसी उद्योग को बसाने के लिए प्रशासन और एनटीपीसी में मिलकर जमीन हथियाने के षड्यंत्र रचे हैं उससे ऐसा प्रतीत होता है कि वह किसानों को बिना पैसा दिया ही इस उद्योग को खड़ा करने की मानसिकता शुरू से बना बैठे थे भू-अर्जन विभाग के बैंकों में एनटीपीसी के भू- विस्थापितों के भू-अर्जन की राशि के खातों का यदि अवलोकन किया जाए तो अरबों रुपए की राशि निसंदेह ही इन भू-विस्थापितों जमा है

जिसे देने में प्रशासन कोई न कोई नया नया षड्यंत्र किए बैठा है जांच होगी यह भी है कि जितनी जमीनें एनटीपीसी के इस उद्योग को लगाने के लिए अधिग्रहित होनी थी उससे ज्यादा जमीन पर एनटीपीसी-लारा काबीज है। 

और संवैधानिक रूप से यदि अकेली आ जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी कि किसानों की जमीनों पर बेजा कब्जा करने का प्रकरण एनटीपीसी के खिलाफ भू अर्जन कार्यालय द्वारा स्वयं ही दर्ज कर लिया जाना था पर उद्योगपतियों के सामने यह प्रशासन नतमस्तक सा दिख रहा है 7 साल से बेजा कब्जा किए हुए जमीन का मालिक एनटीपीसी बन बैठा है और प्रशासन के मुहाने अंधा- कानून पिक्चर के समान कार्य करते हुये दिख रहा है। 

आज आंदोलन स्थल पर समर्थन देने आए पूर्व विधायक विजय अग्रवाल, सरिया के किसान नेता मोहन पटेल, संघर्षशील साथी जयंत बहिदार, किसान नेता लल्लू सिंह, जिला पंचायत सदस्य सफेद गुप्ता, कांग्रेस नेता हरमीत, कांग्रेस नेता अनिल अग्रवाल, राजेश धारीवाल, अनिल शुक्ला आदि ने धरना स्थल पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया और आंदोलन के सफल होने की कामना की।  

हड़तालियों ने आज के प्रश्न में कलेक्टर एवं एसडीएम रायगढ़ से पूछा की बेजा कब्जा धारी के रूप में एनटीपीसी लारा उद्योग के खिलाफ सैकड़ों आवेदन जमीन मालिको के द्वारा कार्यवाही के लिये सरकारी कार्यालय में पावती प्राप्त किए हुए हैं उसके पश्चात भी इस उद्योगपति के खिलाफ कार्यवाही नहीं करना किस संविधान का नियम है? इस पर प्रशासनिक जवाब तो मिलना ही चाहिए?

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