हिंदुओं और हिंदुत्व पर नयी चालाकी

देश में पिछले सौ सालों से हिंदू-मुसलमान का भेदभाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बढ़ाया।;

By :  DB Desk
Update: 2026-08-30 21:20 GMT

देश में पिछले सौ सालों से हिंदू-मुसलमान का भेदभाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बढ़ाया। लेकिन अब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में कहा है कि 'अगर कोई हिंदू सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा'। भागवत ने कहा कि हिंदू होने का अर्थ है यह मानना कि सभी धर्म अंतत: एक ही परम सत्य या ईश्वर तक पहुंचने के अलग-अलग रास्ते हैं और हर इंसान समान सम्मान का अधिकारी है। इसके अलावा भागवत ने मानवता, विविधता में एकता और लोकतंत्र आदि पर भी उदार विचार पेश करने की कोशिश की। शायद संघ प्रमुख को खुशफहमी हो कि उन्होंने विवेकानंद की तरह कोई बड़ा संदेश दुनिया को दिया है। लेकिन देश की जो हकीकत है, उसके बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत की बातों पर दूसरों को छोड़िए, खुद कट्टर हिंदुत्व की बात करने वालों को भी यकीन नहीं आएगा।

संघ की सोच को आगे बढ़ाने के लिए ही भाजपा जैसा राजनैतिक दल बना, जिसने मुसलमानों से नफरत का परिचय देते हुए बाबरी मस्जिद को तोड़ा। उसी जमीन पर राम मंदिर बनाने के लिए शिलान्यास भाजपा के नरेन्द्र मोदी ने किया और मंदिर का उद्घाटन भी उन्होंने भागवत की मौजूदगी में ही किया। अगर सभी धर्म आखिर में ईश्वर तक ही पहुंचाते हैं तो संघ ने कारसेवकों का जत्था बाबरी मस्जिद तोड़ने के लिए क्यों तैयार करवाया। देश में जहां जो भी धर्मस्थल बने हैं, उन्हें वैसे ही बने रहने देते। लेकिन संघ ने तो बाकायदा अयोध्या के बाद काशी-मथुरा की बारी आने का ऐलान किया। अभी भोजशाला में भी पूजापाठ शुरु हो गया है और नमाज पुलिस के पहरे में हो रही है। तो देश भर में ऐसे हजारों उदाहरण मिल जाएंगे, जहां संघ और उसके संगठनों ने हिंदुत्व के परचम को बुलंद करने के लिए गैरहिंदुओं और कमजोर तबकों को प्रताड़ित किया। इनमें न केवल अल्पसंख्यक शामिल हैं, बल्कि आदिवासी, दलित आदि भी सवर्ण हिंदुत्व की मानसिकता के शिकार बनाए गए हैं। मोदी शासनकाल में यह उत्पीड़न और बढ़ा है, जिसके हालिया शिकार कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी हुए।

उत्तराखंड में जिस मंच से उन्होंने भाषण दिया, उसका शुद्धिकरण हुआ और जब राहुल गांधी इसे छुआछूत का अपराध बताते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हैं, तो भाजपा नेता शुद्धिकरण को सही ठहराते हैं। आठ अगस्त को मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ यह अपराध हुआ था, आज तक उस पर तो नरेन्द्र मोदी या मोहन भागवत ने अफसोस नहीं जताया और अब मानवता का उपदेश दे रहे हैं। लेकिन इसमें भी एक चालाकी छिपी है।

मोहन भागवत यह बता रहे हैं कि वह हिंदू नहीं है जो भारत में मुसलमान के रहने का हक नहीं मानता। असल में उन्हें कहना चाहिए था ऐसा इंसान देशभक्त नहीं है। क्योंकि मुसलमान या किसी भी धर्म के लोग भारत में रहें, भारत के नागरिक रहें, यह हक केवल और केवल संविधान दे सकता है। इसमें धर्म या जाति का कोई लेना-देना ही नहीं है। दरअसल यहां भागवत ने गोलवलकर और सावरकर जैसी चालाकी दिखाई है, उन्होंने एक ही देश के नागरिकों के लिए बराबरी के दर्जे की बात नहीं की। यही हिंदुत्व विचारधारा है, जो 'मुस्लिम-मुक्त भारत' की बात खुलकर नहीं करती, बल्कि ऐसे भारत की बात की करती है, जहां मुसलमान हिंदुओं की मर्जी से रह सकते हैं, और उन्हें बार-बार यह याद दिलाया जाता है कि वो दूसरे दर्जे के नागरिक हैं। यह बात समाज के बड़े तबके में अनायास ही पैठाई जा चुकी है। इसलिए कई बार फिल्मों या धारावाहिकों में मुसलमान सैनिक या पुलिस वाले की देशभक्ति अलग से चित्रित की जाती है, जबकि हिंदू किरदार के साथ ऐसा करने की जरूरत नहीं पड़ती। बाकी क्षेत्रों में भी यह भेदभाव नजर आ जाता है।

मुसलमान से उसकी देशभक्ति का सर्टिफिकेट तरह-तरह से मांगा जाता है, हिंदुओं के साथ ऐसा नहीं होता, न ही बौद्ध, सिख या जैन अल्पसंख्यकों के साथ।

इसलिए मोहन भागवत की बातों को बड़ी बारीकी से विश्लेषित करने की जरूरत है। क्योंकि उनका संगठन ही लगातार मुसलमानों के ख़िलाफ़ खुले भेदभाव और हिंसा को बढ़ावा देता आया है। संघ की इस राजनीति की पोल खोलने पर भाजपा बेचैन हो जाती है और अपने राजनैतिक विरोधियों को नागरिकों के रूप में देखने के बजाय उन्हें अर्बन नक्सल, 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' या राष्ट्रविरोधी ताकतों के रूप में पेश किया जाता है। यह खतरनाक खेल मोदी शुरु से करते आए हैं। इस बार उन्होंने एक नया शब्द इसमें जोड़ दिया 'दिमागी नक्सल'। बाकायदा लालकिले से मोदी ने इस शब्द को कहा और अपनी ट्रोल आर्मी को हरी झंडी दिखा दी कि अब उन्हें इसी शब्द को केंद्र में रखकर विरोधियों पर हमले करना है। अब तक भाजपा का आईटी सेल अमित मालवीय संभाल रहे थे, लेकिन 17 अगस्त को भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने यह जिम्मेदारी दीपक म्हस्के को दे दी। अपनी काबिलियत साबित करने के लिए दीपक म्हस्के रोजाना नए-नए वीडियो पोस्ट कर रहे हैं, लगभग सभी में दिमागी नक्सल शब्द केंद्र में होता है। मोदी विरोधी लोगों को दिमागी नक्सल बताकर उन पर बंदूकें चलाना, मारपीट करना और पूरी तरह सफाया करने जैसे वीडियो भाजपा आईटी सेल की तरफ से रोज आ रहे हैं। इन वीडियोज़ में फिल्मों और वेब सिरीज़ की जिन क्लिप्स का इस्तेमाल किया है, उनमें किसी में बड़े पैमाने पर गोलीबारी हो रही है, किसी में खलनायक बेरहमी से मारपीट करते दिख रहे हैं। साफ़ है कि भाजपा सभी आंदोलनकारियों और विरोधियों को दिमागी नक्सल के रूप में चिह्नित कर रही है और उनसे हिंसा से निपटने की बात कर रही है। इसके बाद ये समझना कठिन नहीं है कि जंतर-मंतर पर पैलेट गन किसने चलवाई इस सवाल का जवाब मोदी या शाह क्यों नहीं देते हैं।

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