भारत को मिले अमेरिकी ड्रोन - नौसेना की ताकत में होगा इज़ाफ़ा

अमेरिका ने भारत को दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम लीज पर देने का फैसला किया है। अमेरिकी दूतावास ने सोमवार को कहा कि वह रक्षा मंत्रालय के जनरल एटॉमिक्स के साथ भारतीय नौसेना के लिए दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम लीज पर देने के अनुबंध का स्वागत करता है।;

Update: 2026-08-18 02:00 GMT

एमक्यू‑9बी सी गार्जियन लीज पर - 30 महीने का अनुबंध हुआ तय

  • 1943 करोड़ का सौदा - रक्षा मंत्रालय ने किया स्वागत
  • हिंद महासागर में बढ़ेगी निगरानी - आईएसआर कवरेज से मजबूत होगी सुरक्षा

नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत को दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम लीज पर देने का फैसला किया है। अमेरिकी दूतावास ने सोमवार को कहा कि वह रक्षा मंत्रालय के जनरल एटॉमिक्स के साथ भारतीय नौसेना के लिए दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम लीज पर देने के अनुबंध का स्वागत करता है।

अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “संयुक्त राज्य अमेरिका रक्षा मंत्रालय के जनरल एटॉमिक्स के साथ भारतीय नौसेना के लिए दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम लीज पर देने के अनुबंध का स्वागत करता है। यह क्षमता हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री क्षेत्र की जानकारी और निरंतर आईएसआर कवरेज को बढ़ाएगी, जिससे एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक की हमारी साझा प्रतिबद्धता को बल मिलेगा। हम अमेरिका-भारत रक्षा साझेदारी में निरंतर प्रगति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।”

रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि उसने जनरल एटॉमिक्स एयरोनॉटिकल सिस्टम्स इंक. (जीए-एएसआई) के साथ भारतीय नौसेना के लिए 30 महीने के लिए दो एमक्यू-9बी सी गार्जियन हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (एचएएलई) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम्स (आरपीएएस) लीज पर देने के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह अनुबंध लगभग 1,943 करोड़ रुपए का है। इस पर नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में रक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अंबारासु की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।

मंत्रालय ने कहा, "उन्नत प्रणालियों, अत्याधुनिक सेंसरों और परिष्कृत पेलोड से लैस एम क्यू-9बी सी गार्जियन एचएएलई आरपीएएस भारतीय नौसेना की समुद्री क्षेत्र जागरूकता क्षमताओं को काफी बढ़ाएगा।"

एमक्यू-9बी सी गार्जियन सिस्टम्स के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री क्षेत्र जागरूकता क्षमताओं में काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है। उन्नत प्रणालियों, परिष्कृत सेंसरों और अत्याधुनिक पेलोड से लैस यह रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट समुद्री क्षेत्र के बड़े हिस्सों में निरंतर खुफिया, निगरानी और टोही (आईएसआर) कवरेज प्रदान करेगा।

इन सिस्टम्स की मदद से नौसेना विशाल क्षेत्रों में लगातार निगरानी रख सकेगी और समुद्र में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने और उनका आकलन करने की क्षमता बेहतर हो सकेगी। इनके तैनात होने से हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने और उभरती घटनाओं पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने की भारत की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

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