दिल्ली के निजी स्कूलों पर ब्लैकमेलिंग का आरोप: अभिभावकों का भविष्य दांव पर

दिल्ली में निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई फीस को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि बढ़ी हुई फीस न देने वाले मिडिल क्लास अभिभावकों को निजी स्कूलों द्वारा ब्लैकमेल किया जा रहा है

Update: 2026-02-14 16:38 GMT

बोर्ड परीक्षा रोल नंबर रोककर फीस वसूली? सौरभ भारद्वाज का बड़ा दावा

  • एपीजे और सलवान स्कूल पर दबाव बनाने के आरोप, खिलाड़ी छात्रा भी बनी शिकार
  • AAP नेता बोले– फीस के नाम पर ‘खुल्लम-खुल्ला गुंडागर्दी’, सरकार मूकदर्शक
  • 20 से 80% तक फीस वृद्धि को मिली अप्रत्यक्ष वैधता, सांठगांठ पर उठे सवाल

नई दिल्ली। दिल्ली में निजी स्कूलों द्वारा बढ़ाई गई फीस को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया है कि बढ़ी हुई फीस न देने वाले मिडिल क्लास अभिभावकों को निजी स्कूलों द्वारा ब्लैकमेल किया जा रहा है।

उनका कहना है कि जिन अभिभावकों ने मनमाने ढंग से बढ़ाई गई फीस जमा नहीं की है, उनके बच्चों के बोर्ड परीक्षाओं के रोल नंबर रोक दिए गए हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि उनके पास कई अभिभावकों की शिकायतें सबूतों के साथ पहुंची हैं। उन्होंने दावा किया कि एपीजे स्कूल में एक राष्ट्रीय स्तर की खेल खिलाड़ी छात्रा का रोल नंबर रोक दिया गया है और उस पर बढ़ी हुई फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। इसी तरह सलवान पब्लिक स्कूल में भी अभिभावकों पर अतिरिक्त फीस जमा करने के लिए दबाव डाले जाने की शिकायत सामने आई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर अभिभावकों को डराया जा रहा है कि यदि फीस जमा नहीं की गई तो बच्चों को परीक्षा में बैठने से वंचित कर दिया जाएगा, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होगा। भारद्वाज ने इसे “खुल्लम-खुल्ला ब्लैकमेलिंग और गुंडागर्दी” करार देते हुए कहा कि भाजपा सरकार इस पूरे मामले में मूकदर्शक बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने न तो किसी निजी स्कूल की बढ़ी हुई फीस वापस करवाई है और न ही किसी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इससे सरकार और निजी स्कूल संचालकों के बीच सांठगांठ का संदेह गहराता है। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 से 80 प्रतिशत तक की फीस वृद्धि को अप्रत्यक्ष रूप से वैधता प्रदान कर दी गई है।

गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में फीस कंट्रोल एक्ट को लेकर सुनवाई के दौरान सरकार का शिक्षा विभाग अपनी दलीलें प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं कर सका। कोर्ट ने कानून लाने में जल्दबाजी पर सवाल उठाए थे। सरकार ने स्पष्ट किया था कि 1 अप्रैल 2025 से शुरू हुए शैक्षणिक सत्र 2025-26 में बढ़ाई गई फीस की समीक्षा इस कानून के तहत नहीं की जाएगी। इसके अतिरिक्त दिल्ली हाई कोर्ट ने फीस निर्धारण के लिए स्कूलों में गठित कमेटियों पर भी रोक लगा दी है।

Tags:    

Similar News