मौजूदा स्थिति निराश करती है, इसे जल्दी खत्म होते देखना चाहता हूं : गांगुली

बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा है कि वह कोरोनावायरस के कारण लगे लॉकडाउन के चलते अपने परिवार के साथ समय बिताने का लुत्फ ले रहे हैं

Update: 2020-05-03 16:13 GMT

कोलकाता | बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली ने कहा है कि वह कोरोनावायरस के कारण लगे लॉकडाउन के चलते अपने परिवार के साथ समय बिताने का लुत्फ ले रहे हैं लेकिन इस महामारी के कारण जो लोग संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें लेकर वो बेहद दुखी हैं। गांगुली ने फीवर नेटवर्क द्वारा शुरू किए गए 100 घंटे 100 स्टार नाम के शो में कहा, "लॉकडाउन को एक महीने का समय हो गया है। मुझे शुरुआत में ज्यादा परेशानी नहीं थी।"

उन्होंने कहा, "पहले मुझे इस तरह घर पर समय बिताने का समय नहीं मिलता था। मेरी जीवनशैली में हर दिन काम के लिए सफर करना था। बीते 30-32 दिनों से मैं अपने घर में परिवार के साथ हूं, अपनी पत्नी, बेटी, मां और भाई के साथ समय बिता रहा हूं। मुझे ऐसा समय काफी दिनों बाद मिला है। इसलिए मैं इसका लुत्फ ले रहा हूं।"

उन्होंने कहा, "लेकिन, में मौजूदा स्थिति को देखकर निराश भी हूं क्योंकि कई सारे लोग बाहर मुश्किल में हैं। हम अभी तक इस बात को समझने के लिए संघर्ष करते दिख रहे हैं कि इस महामारी को कैसे रोका जाए। पूरे विश्व में इस समय फैला यह माहौल मुझे परेशान कर रह है। हम नहीं जानते कि यह कब कैसे और कहां से आया। हम सभी इसके लिए तैयार नहीं थे।"

उन्होंने कहा, "लोग इससे काफी ज्यादा प्रभावित हैं। कई मौतें हो चुकी हैं। यह स्थिति मुझे निराश करती है और मैं डरा हुआ भी महसूस करता हूं। लोग मेरे घर पर राशन, खाने का सामान देने आते हैं तो मुझे थोड़ा बहुत डर लगता है। इसलिए यह मिश्रित अहसास है। मैं चाहता हूं कि यह जल्दी से जल्दी खत्म हो।"

गांगुली ने कहा कि वह अपने प्रशासनिक काम घर से ही कर रहे हैं और इसी दौरान उन्हें अपने खेलने वाले दिनों का अनुभव काम आ रहा है।

उन्होंने कहा, "मैं अपने घर से ही बीसीसीआई और आईसीसी का काम कर रहा हूं और मेरा खुद का भी। लेकिन मेरा खुद का काम काफी कम है क्योंकि खेल को लेकर शूटिंग और स्कूल सभी बंद हैं। कागजी काम, प्राशसनिक काम मैं यह सब घर से ही कर रहा हूं।"

उन्होंने कहा, "क्रिकेट ने मुझे काफी कुछ सिखाया है। मैंने हकीकत में, ज्यादा दबाव वाली स्थिति का सामना किया है। आपको रन बनाने की जरूरत है और एक गेंद बची होती है। अगर आप एक गलत चाल चलते हैं,गलत कदम उठाते हैं तो, आपको दोबारा मौका नहीं मिलेगा। इस तरह की स्थिति आपको अलर्ट बनाती हैं और जिंदगी की स्थिति के लेकर सजग बनाती है।"

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