जलियाँवाला बाग बिल के बहाने इतिहास को लेकर भिड़े कांग्रेस और सत्तापक्ष

जलियाँवाला बाग हत्याकांड केे बहाने कांग्रेस ने सत्ता पक्ष पर इतिहास को बदलने का आरोप लगाया जबकि सत्तापक्ष ने कांग्रेस पर इतिहास को अपनी राजनीति के हिसाब से ‘मैन्युफैक्चर’ करने का आरोप लगाया

Update: 2019-08-02 16:40 GMT

नयी दिल्ली। जलियाँवाला बाग हत्याकांड केे बहाने कांग्रेस ने सत्ता पक्ष पर इतिहास को बदलने का आरोप लगाया जबकि सत्तापक्ष ने कांग्रेस पर इतिहास को अपनी राजनीति के हिसाब से ‘मैन्युफैक्चर’ करने का आरोप लगाया।

जलियाँवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक (संशोधन) विधेयक, 2019 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के सांसद गुरजीत सिंह औजला और शिरोमणि अकाली दल की ओर से केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के बीच तीखी तकरार हुई। 

इससे पहले संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने विधेयक को चर्चा के लिए पेश करते हुए कहा कि इस विधेयक के माध्यम से राष्ट्रीय स्मारक को राजनीतिकरण से मुक्त करके उसका राष्ट्रीयकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधेयक में केवल दो संशोधन किये गये हैं। धारा चार (ख) का विलोपन करके एक राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष का नाम हटाने तथा लोकसभा में सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता का नाम शामिल करने और धारा पाँच में संशोधन ट्रस्ट के सदस्यों को पाँच वर्ष की अवधि से पहले ही हटाने का प्रावधान किया गया है। 

चर्चा की शुरुआत करते हुए अमृतसर से निर्वाचित श्री औजला ने संशोधनों का विरोध करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष पर आरोप लगाया कि इनका पेशा है कि इतिहास को खत्म कर दिया जाये। उन्होंने कहा कि जलियाँवाला बाग में कांग्रेस के नेताओं सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल ने आमसभा का आयोजन किया था और उसमें रॉलेट एक्ट का विरोध का आंदोलन खड़ा किया जा रहा था। जनरल डायर ने वहाँ आकर पाँचों गेट बंद करके लोगों पर तब तक गोलियाँ बरसाईं जब तक सारी गोलियाँ खत्म नहीं हो गयीं। 

उन्होंंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने आंदाेलन शुरू किया और उसी ने जलियाँवाला बाग को अपने पैसे से खरीद कर राष्ट्रीय स्मारक बनाया। आजादी के आंदोलन में कांग्रेस के नेताओं ने शहादत दी। इसलिए जलियाँवाला बाग के ट्रस्ट में कांग्रेस के नेताओं का नाम रहने देना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में टिप्पणी की जिस पर सत्तापक्ष की ओर से कड़ा ऐतराज जताया गया। 

इसके तुरंत बाद शिरोमणि अकाली दल की ओर से श्रीमती बादल ने कहा कि कांग्रेस को अपने मतलब का इतिहास याद रहता है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश सरकार ने भी जिस जलियाँवाला बाग कांड को शर्मसार करने वाला बताया है, पंजाब के वर्तमान मुख्यमंत्री के दादा और तत्कालीन पटियाला के महाराजा भूपेन्दर सिंह ने उसे जायज ठहराया था और जनरल डायर को ट्रेलीग्राम भेजकर उस नरसंहार का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि पटियाला के महाराजा ने जनरल डायर को भोज पर भी आमंत्रित किया था। उन्होंने अपने दावे के पक्ष में दस्तावेज भी प्रदर्शित किये। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग जलियाँवाला बाग को राष्ट्रीय स्मारक बनाने के लिए अपनी पार्टी को श्रेय देते हैं, लेकिन उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि कांग्रेस का इतिहास 1984 के ‘कत्लेआम’ से भी जुड़ा है। अकाल तख्त पर हमला यानी ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ भी कांग्रेस के समय में हुआ था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोगों को इतिहास को ‘मैन्युफैक्चर’ करने का अनुभव है। इसलिए ऐसे लोगों को जलियाँवाला बाग मेमोरियल ट्रस्ट में रखने का कोई मतलब नहीं है।

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