सांप्रदायिकता हमेशा संस्कृति की दुहाई देती है: राहुल गांधी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज 20वीं शताब्दी की शुरुआत के सबसे प्रमुख व लोकप्रिय लेखकों में से एक मुंशी प्रेमचंद के आलेख के एक अंश का उदाहरण देते हुए कहा कि सांप्रदायिकता हमेशा संस्कृति क
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज 20वीं शताब्दी की शुरुआत के सबसे प्रमुख व लोकप्रिय लेखकों में से एक मुंशी प्रेमचंद के आलेख के एक अंश का उदाहरण देते हुए कहा कि सांप्रदायिकता हमेशा संस्कृति की दुहाई देती है।
प्रेमचंद को सम्मान देते हुए राहुल ने हिंदी में ट्वीट करते हुए कहा, "सांप्रदायिकता सदैव संस्कृति की दुहाई दिया करती है उसे अपने असली रूप में निकलने में शायद लज्जा आती है, इसलिए वह उस गधे की भांति, जो सिंह की खाल ओढ़कर जंगल में जानवरों पर रौब जमाता फिरता था, संस्कृति का खोल ओढ़कर आती है।"
सांप्रदायिकता सदैव संस्कृति की दुहाई दिया करती हैl उसे अपने असली रूप में निकलने में शायद लज्जा आती है, इसलिए वह उस गधे की भांति, जो सिंह की खाल ओढ़कर जंगल में जानवरों पर रौब जमाता फिरता था, संस्कृति का खोल ओढ़कर आती हैl
हिंदुस्तान के महानतम लेखक मुंशी प्रेमचंद की याद को प्रणाम l
राहुल का संदर्भ प्रेमचंद द्वारा सांप्रदायिकता और संस्कृति पर एक संक्षिप्त आलेख का एक अंश था जिसे मूल रूप से वर्ष 1934 में लिखा गया था।