कोलगेट मामले में अदालत ने कंपनी, निदेशकाें के खिलाफ आरोप तय किये
नयी दिल्ली ! केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीअाई) के विशेष जज भारत पाराशर ने कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में आज रांची स्थित एक कंपनी, उसके तीन निदेशकों और दो अन्य के खिलाफ आरोप तय किये।
नयी दिल्ली ! केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीअाई) के विशेष जज भारत पाराशर ने कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में आज रांची स्थित एक कंपनी, उसके तीन निदेशकों और दो अन्य के खिलाफ आरोप तय किये।
सीबीआई ने अपनी जांच के बाद दायर आरोप पत्र में कहा था कि डोम्को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने ओडिशा के राय रंगपुर में दो लाख टन प्रति वर्ष की क्षमता वाले एक पिग आयरन संयंत्र की स्थापना के लिये कैप्टिव कोल ब्लॉक आवंटित किये जाने के मामले में इस्पात मंत्रालय के समक्ष अावेदन किया था।
आरोप पत्र में कहा गया है कि इस संबंध में कंपनी ने कोयला ब्लॉक आवंटन के लिये कोयला मंत्रालय के समक्ष भी आवेदन किया था और उपलब्ध कराये गये दस्तावेजों एवं जानकारी के आधार पर कंपनी को अंतत: झारखंड के पश्चिमी बोकारों कोयला क्षेत्र में लाल गढ़ (उत्तर कोयला ब्लॉक) आवंटित कर दिया गया था।
सीबीआई की ओर से दायर आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुये अदालत ने इस मामले में मैसर्स डोम्को प्रा. लिमिटेड, उसके तीन निदेशकों विनय प्रकाश, वसंत दिवाकर मांजरेकर और परमनंदा मंडल, चार्टर्ड अकाउंटेंट मनोज कुमार गुप्ता तथा संजय खंडेलवाल को तलब किया।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपियों के खिलाफ तथ्यों एवं परिस्थितियों के अाधार पर प्रथम दृष्टया धोखाधडी एंव आपराधिक षडयंत्र रचने का कोई मामला नहीं बनता है।
अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद न्यायालय ने आदेश पारित करते हुये कहा कि कंपनी, उसके तीन निदेशकों और दोनों चार्टर्ड अकाउंटेंटों के खिलाफ प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत धोखाधड़ी एवं आपराधिक षडयंत्र रचने का मामला बनता है। दोनों पक्षाें को सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिये। हालांकि इन सभी ने खुद को निर्दोष बताया है।